ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है। बॉक्सिंग और जूडो प्रतियोगिताओं में भारत के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा ऊंचा किया। भारतीय बॉक्सर हर्ष ने बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि जूडो में अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को बड़ी सफलता दिलाई। भारतीय जूडो टीम के कोच वीरेंद्र सिंह ने भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए आगे और स्वर्ण पदकों की उम्मीद जताई है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाज हर्ष ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह उपलब्धि हासिल करना उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि पूरी टीम ने लंबे समय तक इसी लक्ष्य के साथ तैयारी की थी और मेहनत का परिणाम अब पूरे देश के सामने है।
हर्ष ने अपनी जीत को अपनी मां को समर्पित करते हुए कहा, “भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। हमने इसी लक्ष्य के साथ तैयारी की थी कि हमें जीतना है। मैं यह मेडल अपनी मां को समर्पित करता हूं।” उनके इस भावुक बयान ने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।
वहीं जूडो प्रतियोगिता में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय जूडो टीम के कोच वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दिनभर पांच अलग-अलग भार वर्गों में मुकाबले हुए, जिनमें भारत ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय खिलाड़ी तीसरे स्वर्ण पदक पर भी कब्जा कर सकते हैं।
कोच वीरेंद्र सिंह ने कहा, “आज का दिन भारतीय जूडो टीम के लिए बेहद शानदार रहा। पांच वजन वर्गों में मुकाबले हुए, जिनमें से दो में हमने गोल्ड मेडल जीत लिया है। हमारी कोशिश है कि तीसरा गोल्ड भी भारत की झोली में आए। खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास और मेहनत के साथ मुकाबले खेले, वह काबिल-ए-तारीफ है।”
भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे की जीत पूरे देश के लिए भावुक पल लेकर आई। महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उन्हें लगा कि उनका खेल करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने खुद को संभाला और दो महीने बाद कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेकर दोनों के लिए क्वालिफाई किया।
अस्मिता ने कहा, “मेरे पिता ने हमेशा मेरा साथ दिया। उनके जाने के बाद मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम है और पहले ही प्रयास में गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए अविस्मरणीय पल है।”
उन्होंने कहा कि यह स्वर्ण पदक केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारत की जीत है। उन्होंने अपने परिवार, कोच और उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। बॉक्सिंग और जूडो में मिले स्वर्ण पदकों ने भारत के पदक अभियान को और मजबूत किया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय खिलाड़ी आने वाले मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए और पदक जीत सकते हैं।
भारत के खिलाड़ियों की यह सफलता न केवल उनकी वर्षों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह देश में खेल संस्कृति के लगातार मजबूत होने का भी प्रमाण है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर पूरे देश में खुशी का माहौल है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी लगातार बधाइयां मिल रही हैं।












