लखनऊ: सावन के पावन महीने में लखनऊ के प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर के मुख्य गेट पर की गई सजावट और लगाए गए एक बोर्ड को हटाए जाने के बाद शिव भक्तों में नाराजगी की बात सामने आई है। विवाद के बीच मंदिर से जुड़े लोगों और स्थानीय जनप्रतिनिधि के समर्थकों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
श्रावण मास में मनकामेश्वर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से समय-समय पर व्यवस्थाएं की जाती रही हैं। फरवरी 2026 में भी महाशिवरात्रि से पहले लखनऊ प्रशासन के अधिकारियों ने मनकामेश्वर मंदिर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए थे।
क्या है पूरा मामला?
उपलब्ध जानकारी और आयोजकों की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, सावन के दौरान मंदिर के मुख्य गेट पर भगवान भोलेनाथ की तस्वीर और लाइटिंग के साथ सजावट की गई थी। इस सजावटी बोर्ड पर स्थानीय पार्षद रंजीत सिंह यादव के नाम के साथ श्रद्धालुओं के लिए धन्यवाद संदेश भी लिखा था।
आयोजकों का दावा है कि यह सजावट शासन-प्रशासन की ओर से सावन के दौरान मंदिरों और शिव भक्तों की सुविधाओं को लेकर की जा रही व्यवस्थाओं के क्रम में की गई थी। बाद में नगर निगम अधिकारियों से कहकर इस बोर्ड को हटवा दिया गया।
हालांकि, बोर्ड हटाए जाने के कारण की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर बढ़ी नाराजगी
बोर्ड हटाए जाने के बाद विवाद उस समय और बढ़ गया, जब मंदिर की महंत की ओर से सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर कुछ शिव भक्तों ने आपत्ति जताई।
शिव भक्तों का आरोप है कि टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस मामले को लेकर भक्तों ने प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज कराने की बात कही है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी टिप्पणी की वास्तविकता, उसका पूरा संदर्भ और उसके मूल स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उसे तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान
विवाद के बीच शिव भक्तों की ओर से शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की गई है। प्रेस नोट के मुताबिक, मार्च झूलेलाल वाटिका से नगर निगम कार्यालय तक निकाला जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि मार्च का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद या अशांति पैदा करना नहीं, बल्कि मंदिर की धार्मिक गरिमा और भक्तों की भावनाओं से जुड़े मुद्दे को प्रशासन तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है।
कौन हैं रंजीत सिंह यादव?
मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह यादव का नाम लखनऊ नगर निगम के रिकॉर्ड से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में भी सामने आता रहा है। 2023 के नगर निकाय चुनाव में मनकामेश्वर मंदिर वार्ड से रंजीत सिंह के भाजपा प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित होने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
इससे पहले 2025 में भी मनकामेश्वर वार्ड में सीवर लाइन के काम को लेकर रंजीत सिंह यादव नगर निगम मुख्यालय में धरने और भूख हड़ताल पर बैठे थे। उस समय उन्होंने क्षेत्र में सीवर कार्य पूरा कराने की मांग उठाई थी।
मनकामेश्वर मंदिर क्यों है खास?
डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मंदिर लखनऊ के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। सावन और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। फरवरी 2026 में महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतार लगने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
ऐसे में सावन के दौरान मंदिर के आसपास सजावट, यातायात, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े इंतजामों का महत्व और बढ़ जाता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल विवाद के दो प्रमुख पहलू हैं—पहला, मंदिर गेट पर लगाए गए सजावटी बोर्ड को हटाया जाना और दूसरा, सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर भक्तों की नाराजगी।
मामले में नगर निगम, मंदिर प्रशासन और पुलिस-प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
नई सोच नई ऊर्जा की अपील है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े किसी भी विवाद में सभी पक्ष संयम बनाए रखें और किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट या आरोप को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संदर्भ की पुष्टि जरूर करें।













