लखनऊ। संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। इसी क्रम में शनिवार को राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संसद में किए गए विरोध के दौरान भगवान श्रीराम और हिंदू आस्था का अपमान किया गया, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का प्रतीकात्मक पुतला फूंककर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में भगवा गमछे और धार्मिक नारे लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे। “जय श्रीराम” और “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारों से पूरा हजरतगंज क्षेत्र गूंज उठा। मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम भी बड़ी संख्या में तैनात रही ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संसद देश के लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और वहां किसी भी धार्मिक प्रतीक या करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े विषय पर कथित रूप से अपमानजनक प्रदर्शन करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप था कि विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया है, जिसके विरोध में पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने पहले नेताओं के चित्र लगे पुतले को सड़क पर रखकर नारेबाजी की और बाद में उसे आग के हवाले कर दिया। पुतला दहन के समय सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई तथा पुलिसकर्मी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, हालांकि कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित जरूर रहा।
प्रदर्शन में मौजूद संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों पर इस प्रकार की राजनीति जारी रही तो देशभर में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने केंद्र और संबंधित एजेंसियों से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई।
गौरतलब है कि संसद परिसर में विपक्षी नेताओं द्वारा राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया गया था। उसी प्रदर्शन को लेकर कई धार्मिक संगठनों और संतों ने आपत्ति जताई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित विभिन्न स्थानों पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और कुछ मामलों में पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
हजरतगंज में हुए प्रदर्शन के दौरान “नई सोच नई ऊर्जा” ने मौके पर मौजूद संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े मुद्दे का है। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम देश की सांस्कृतिक पहचान हैं और उनके सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि संसद परिसर में किया गया प्रदर्शन सरकार पर लगाए गए आरोपों और राजनीतिक मुद्दों को उठाने के लिए था, न कि किसी धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से। हालांकि इस पूरे मामले ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं।
फिलहाल लखनऊ में प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने के संकेत दिए हैं।













