अमेरिकी सेना ने बनाया विशेष शिपिंग कॉरिडोर, Axios की रिपोर्ट में दावा- हर रात 15 से 20 टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का सबसे संवेदनशील मोर्चा अब होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते को लेकर तेहरान और वॉशिंगटन के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में एक ऐसे सैन्य अभियान का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए अमेरिका कथित तौर पर तेल टैंकरों की आवाजाही को सीमित स्तर पर जारी रखने की कोशिश कर रहा है।
Axios की 19 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने होर्मुज में एक विशेष शिपिंग कॉरिडोर तैयार किया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस व्यवस्था के तहत हर रात करीब 15 से 20 वाणिज्यिक टैंकरों को जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से से सुरक्षित तरीके से निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह गतिविधि युद्ध से पहले की सामान्य समुद्री आवाजाही की तुलना में काफी कम है।
सिर्फ तेल लेकर निकलने वाले जहाजों पर नजर नहीं
बताया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था का मकसद केवल खाड़ी से तेल लेकर बाहर निकलने वाले टैंकरों को सुरक्षा देना नहीं है। खाली टैंकरों की खाड़ी में आवाजाही को भी सुरक्षित बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे तेल लोड करने के लिए खाड़ी के बंदरगाहों तक पहुंच सकें और बाद में वापस निकल सकें।
इस पूरी प्रक्रिया को एक तय व्यवस्था के तहत संचालित किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सैन्य तनाव के बावजूद ऊर्जा की आपूर्ति पूरी तरह ठप न हो।
फोर्ट ब्रैग से हो रहा है समन्वय
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान का समन्वय अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग से किया जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सहयोगी देशों के साथ मिलकर उन जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करते हैं जिन्हें इस संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरना है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभावित ड्रोन और मिसाइल हमलों से जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इस अभियान से जुड़ी सभी परिचालन जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
ईरान की निगरानी क्षमता पर अमेरिकी कार्रवाई का असर?
Axios के अनुसार, अमेरिका की यह रणनीति उस सैन्य अभियान के बाद संभव हुई जिसमें अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के रडार और समुद्री निगरानी ढांचे को नुकसान पहुंचाने का दावा किया था। अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि इससे ईरान की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता प्रभावित हुई है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि होर्मुज में समुद्री यातायात सामान्य हो गया है। उपलब्ध शिप-ट्रैकिंग आंकड़े बताते हैं कि यहां आवाजाही अभी भी बेहद सीमित है।
ईरान कह रहा है- जलडमरूमध्य बंद है
होर्मुज की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बयान बिल्कुल अलग हैं। ईरान की ओर से जलडमरूमध्य को बंद रखने की बात कही जा रही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे खुला बताते रहे हैं।
20 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को Kpler के आंकड़ों में नौ-नौ कमोडिटी जहाजों के गुजरने की जानकारी सामने आई। इसका मतलब यह है कि मार्ग पर कुछ जहाजों की आवाजाही हो रही है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों की तुलना में यातायात बेहद कम है। कुछ जहाज ट्रांसपोंडर बंद करके चल सकते हैं, इसलिए ट्रैकिंग आंकड़े वास्तविक संख्या से कम भी हो सकते हैं।
दुनिया के तेल बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर कच्चे तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान इस मार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
हालिया तनाव का असर तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। 20 अगस्त को Brent crude की कीमत बढ़कर 93.81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि WTI भी करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। Reuters के मुताबिक, दोनों प्रमुख बेंचमार्क लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़े और 24 जुलाई के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।
क्या अमेरिका तेल की सप्लाई को पूरी तरह सामान्य कर पाएगा?
फिलहाल इसका जवाब आसान नहीं है। अमेरिका सीमित संख्या में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन होर्मुज में समुद्री यातायात अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी नीचे है।
Reuters के आंकड़ों के मुताबिक, 19 अगस्त को केवल छह कमोडिटी जहाजों ने होर्मुज पार किया था। यह संख्या हाल के औसत से भी कम थी। वहीं, चीन की दो बड़ी सरकारी शिपिंग कंपनियों ने भी सुरक्षा जोखिमों के कारण जुलाई के अंत से होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों से अपने परिचालन को रोक दिया है।
ट्रंप के लिए भी बना बड़ा रणनीतिक मुद्दा
होर्मुज का संकट केवल सैन्य या कूटनीतिक मामला नहीं है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। अमेरिका भी इसी वजह से समुद्री रास्ते से ऊर्जा की आवाजाही बनाए रखने को अहम मान रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले भी होर्मुज को खुला रखने और वहां जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही है। दूसरी तरफ ईरान का रुख अभी भी कड़ा है और वह अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर अपनी आपत्तियां जारी रखे हुए है।
फिलहाल स्थिति यह है कि होर्मुज पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है, लेकिन पूरी तरह बंद भी नहीं दिख रहा। अमेरिकी सैन्य प्रयासों और सीमित जहाज आवाजाही के बावजूद यह समुद्री मार्ग अभी भी बेहद जोखिमपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम यह तय करेगा कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम होता है या संकट और गहराता है।
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