लखनऊ, 24 अगस्त 2026। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक पेपर नहीं होती, बल्कि महीनों की मेहनत, उम्मीद और बेहतर भविष्य का सपना होती है। ऐसे में अगर कोई गिरोह पैसे के दम पर नकल कराने या परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाकर किसी अभ्यर्थी को फायदा पहुंचाने की कोशिश करे, तो यह उन सभी मेहनती अभ्यर्थियों के साथ सीधा अन्याय है। लखनऊ में महानगर पुलिस ने ऐसे ही एक मामले का खुलासा करते हुए परीक्षा में नकल कराने की कथित तैयारी कर रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, थाना महानगर पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई में सत्यप्रकाश यादव और रमेश चन्द्र पटेल को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों प्रतियोगी परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के माध्यम से नकल कराने की योजना से जुड़े थे। पुलिस ने इनके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मार्कशीट, शैक्षिक प्रमाण पत्र, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड समेत कई दस्तावेज और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।
परीक्षा केंद्र से शुरू हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा से जुड़ा है। महानगर थाना क्षेत्र स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज, सेक्टर-सी में परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना के आधार पर 23 अगस्त 2026 को यूपी एसटीएफ और महानगर पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए बृजेश कुमार यादव उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ और जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसी कड़ी में दो अन्य आरोपियों तक पुलिस पहुंची। पुलिस की जांच में सामने आया कि परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के जरिए प्रश्नों के उत्तर अभ्यर्थी तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।
होटल के रजिस्टर ने खोला एक अहम सुराग
पुलिस की जांच किसी फिल्मी कहानी की तरह नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सुरागों को जोड़ते हुए आगे बढ़ी। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बृजेश कुमार यादव अपने एक साथी के साथ निशातगंज चौराहे के पास स्थित एक होटल में रुका है।
टीम ने होटल पहुंचकर रजिस्टर की जांच की। रजिस्टर में सीरियल नंबर 2098 पर बृजेश कुमार यादव और सत्यप्रकाश यादव के ठहरने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाली और सत्यप्रकाश की पहचान करते हुए उसकी तलाश शुरू की।
पुलिस के मुताबिक, सत्यप्रकाश यादव को दयानंद इंटर कॉलेज से कुछ दूरी पर अपने साथी का इंतजार करते हुए पाया गया। पूछताछ में उसने पुलिस को कथित तौर पर रमेश चन्द्र पटेल से हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम प्रयागराज पहुंची और संगम रेलवे स्टेशन के सामने रमेश चन्द्र पटेल को बुलाकर पूछताछ की।
नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों की बात का भी खुलासा
पुलिस की पूछताछ में इस मामले का एक और पहलू सामने आया। पुलिस के अनुसार, सत्यप्रकाश ने बताया कि उसने नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए थे और यह रकम रमेश चन्द्र पटेल को दी थी।
वहीं पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में रमेश चन्द्र पटेल ने बताया कि उसने बृजेश कुमार यादव की नौकरी को लेकर अन्य लोगों से बातचीत की थी। पुलिस के अनुसार, नौकरी के लिए 5 लाख रुपये की बात हुई थी और इसमें उसे 1 लाख रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि इसी रकम में से 50 हजार रुपये सत्यप्रकाश को देने के लिए उसके पास रखे गए थे।
इसी जानकारी और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने सत्यप्रकाश यादव और रमेश चन्द्र पटेल को गिरफ्तार किया। हालांकि इन बयानों और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
50 हजार रुपये नकद समेत सामान बरामद
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में ऐसी चीजें मिली हैं, जिनकी जांच मामले की आगे की कड़ियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
बरामद सामान में चार मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड, 13 मार्कशीट एवं शैक्षिक प्रमाण पत्र, पांच ब्लैंक चेक, दो चेकबुक, लैपटॉप सर्विस की एक रसीद, एडमिट कार्ड की छायाप्रति, आधार कार्ड की छायाप्रति, बैंक ऑफ बड़ौदा की दो जमा पर्चियां, दो पैन कार्ड, दो एटीएम कार्ड, दो ड्राइविंग लाइसेंस, दो आधार कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्ड, माध्यमिक शिक्षा परिषद का परिचय पत्र, पॉकेट डायरी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से संबंधित सामान शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने 50,000 रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि रमेश चन्द्र पटेल के कब्जे से अलग-अलग लोगों के नाम की मार्कशीट और शैक्षिक प्रमाण पत्र भी मिले। साथ ही उसकी जेब से 50 हजार रुपये नकद बरामद होने की बात कही गई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल नंबरों की जांच में आपस में लेन-देन की जानकारी मिलने का भी उल्लेख किया है।
दो आरोपी गिरफ्तार, दो अन्य की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सत्यप्रकाश यादव पुत्र अच्छेलाल, निवासी जिऊ पट्टी, थाना सिरमौर, जनपद जौनपुर, हाल पता प्रयागराज और रमेश चन्द्र पटेल पुत्र तुलसीराम, निवासी रामपुर, थाना मछलीशहर, जनपद जौनपुर, हाल पता प्रयागराज के रूप में हुई है।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में दो अन्य वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी हैं। यानी जांच अभी खत्म नहीं हुई है और पुलिस इस नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
परीक्षा में ब्लूटूथ के जरिए नकल कराने की कथित योजना
पूछताछ के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के माध्यम से उत्तर बताने की योजना बनाई गई थी। पुलिस के मुताबिक, अभ्यर्थी बृजेश कुमार यादव को परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब ब्लूटूथ के माध्यम से उपलब्ध कराने की तैयारी थी।
पुलिस का दावा है कि इस काम के लिए बृजेश कुमार यादव ने रमेश चन्द्र पटेल को एडवांस में कुछ रुपये भी दिए थे। पूरे मामले में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े थे और क्या इससे पहले भी किसी परीक्षा में इसी तरह की गतिविधि की गई थी। उपलब्ध प्रेस नोट में आगे की जांच के परिणाम का विवरण नहीं दिया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
महानगर थाने में इस मामले को लेकर मु0अ0सं0 157/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस प्रेस नोट के अनुसार मामले में धारा 61(2)/318(4) बीएनएस तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 13(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने यह भी बताया है कि मामले की विवेचना सहायक पुलिस आयुक्त, महानगर, लखनऊ के स्तर से की जा रही है।
मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बड़ा सवाल

प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों युवा दिन-रात मेहनत करते हैं। कोई नौकरी के लिए सालों तैयारी करता है तो कोई आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई करता है। ऐसे में परीक्षा में नकल कराने वाले किसी भी नेटवर्क की मौजूदगी सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भरोसे से भी जुड़ा सवाल है।
लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई में बरामद दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल और नकदी की जांच अब यह तय करने में अहम होगी कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और दो अन्य वांछित लोगों की तलाश जारी बताई है। मामले में आगे की तस्वीर जांच और न्यायिक कार्रवाई के बाद ही साफ होगी। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक राजू कृष्ण सिंह, उपनिरीक्षक राजेन्द्र प्रसाद, उपनिरीक्षक दीपक कुमार बिन्द और कांस्टेबल अविन कुमार शामिल रहे।
नोट: यह खबर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी प्रेस नोट के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए आरोप पुलिस के अनुसार हैं; आरोपियों के संबंध में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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