लखनऊ, 24 अगस्त 2026। राजधानी लखनऊ के ऐशबाग इलाके में स्थित जैन मंदिर में हुई चोरी की घटना का बाजारखाला पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से मंदिर से चोरी की गई भगवान अनंतनाथ की प्रतिमा समेत अष्टधातु और चांदी से जुड़े सामान की शत-प्रतिशत बरामदगी की गई है। पुलिस के मुताबिक बरामद चोरी के माल की कीमत करीब 15 लाख रुपये है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी पहले इसी मंदिर परिसर में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर चुका था। नौकरी के दौरान उसे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ वहां आने वाले चढ़ावे और कीमती धातु से बनी धार्मिक वस्तुओं की जानकारी हो गई थी। नौकरी जाने के बाद उसने कथित तौर पर मंदिर में चोरी की योजना बनाई और इंटरनेट पर ताला खोलने के तरीके सीखने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, चोरी की रात आरोपी पेट्रोल, सिरिंज और प्लास लेकर मंदिर पहुंचा था। उसने ताला खोलने के लिए पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की और बाद में प्लास की मदद से ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद वह भगवान अनंतनाथ की प्रतिमा और अन्य सामान लेकर फरार हो गया।
20-21 अगस्त की रात हुई थी चोरी
पुलिस के मुताबिक, 20 और 21 अगस्त 2026 की रात जैन मंदिर चैत्यालय, आटा मिल परिसर, मिल रोड, ऐशबाग से चोरी की घटना सामने आई थी। मंदिर से भगवान अनंतनाथ की पीली धातु की एक प्रतिमा, पांच सफेद धातु के पंचमेरू, पांच सफेद धातु के सिंहासन-छत्र, एक सफेद धातु का सिंहासन और नकदी चोरी हुई थी।
घटना की सूचना मिलने के बाद बाजारखाला थाने में मु0अ0सं0 0163/2026 के तहत धारा 305/331(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया। मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और घटना के जल्द खुलासे के लिए टीम गठित की।
पुलिस टीम ने मंदिर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को बारीकी से खंगाला। इसके साथ ही तकनीकी जानकारी और मुखबिर तंत्र की भी मदद ली गई। पुलिस का कहना है कि टीम की लगातार मेहनत और जांच के बाद 48 घंटे के अंदर आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
कभी मंदिर की सुरक्षा करता था आरोपी
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि आरोपी संजय शुक्ला पहले मंदिर परिसर में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर चुका था। पुलिस के अनुसार वह करीब छह महीने पहले आटा मिल, गुलजार नगर में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता था।
उसके व्यवहार के कारण उसे नौकरी से हटा दिया गया था। नौकरी के दौरान आरोपी मंदिर की देखभाल और सुरक्षा का काम भी करता था। इसी वजह से उसे मंदिर के भीतर रखी धार्मिक वस्तुओं, चढ़ावे और चांदी से बने सिंहासन, छत्र, पंचमेरू आदि के बारे में जानकारी हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, नौकरी जाने के बाद उसने इसी जानकारी का फायदा उठाकर मंदिर में चोरी करने की योजना बनाई।
यानी जिस जगह की कभी वह सुरक्षा करता था, पुलिस के मुताबिक उसी जगह को बाद में उसने निशाना बना लिया। यही वजह है कि इस मामले में आरोपी की पुरानी भूमिका जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।
YouTube से सीखा ताला खोलने का तरीका
पुलिस के अनुसार, चोरी को अंजाम देने से पहले आरोपी ने YouTube के माध्यम से ताला खोलने के तरीके सीखने शुरू किए। पुलिस की जांच में सामने आया कि उसने चोरी के लिए पहले से तैयारी की थी।
20-21 अगस्त की रात वह पेट्रोल, सिरिंज और प्लास आदि सामान लेकर मंदिर पहुंचा। उसने सिरिंज की मदद से पेट्रोल डालकर माचिस से आग लगाकर ताला खोलने का प्रयास किया। जब इससे बात नहीं बनी तो उसने प्लास की मदद से ताला तोड़ दिया और मंदिर में रखी धार्मिक वस्तुओं को चोरी कर वहां से निकल गया।
पुलिस ने आरोपी को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सामने स्थित कॉम्प्लेक्स, थाना विभूतिखंड, लखनऊ के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद चोरी का पूरा माल बरामद कर लिया गया।
भगवान अनंतनाथ की प्रतिमा समेत ये सामान मिला
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मंदिर से चोरी की गई कई धार्मिक वस्तुएं बरामद की हैं। बरामदगी में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- भगवान अनंतनाथ की पीली धातु की 1 प्रतिमा
- सफेद धातु के 5 पंचमेरू
- सफेद धातु के 5 सिंहासन-छत्र
- सफेद धातु का 1 सिंहासन
- 1,231 रुपये नकद
- मरून-भूरे रंग का 1 बैग
पुलिस के मुताबिक चोरी के सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये है। प्रेस नोट में पुलिस ने चोरी किए गए माल की शत-प्रतिशत बरामदगी का दावा किया है।
प्रेस नोट के तीसरे पेज पर बरामद धार्मिक वस्तुओं और पुलिस टीम के साथ आरोपी की तस्वीर भी दी गई है। तस्वीर में पुलिसकर्मी बरामद सामान को मेज पर रखकर दिखाते नजर आ रहे हैं।
पहले भी मंदिर चोरी में नाम सामने आया

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सामान्य किस्म का चोर नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पहले भी चोरी के मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक संजय शुक्ला के खिलाफ सीतापुर के महोली थाने में चोरी और चोरी के माल की बरामदगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।
पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ वर्ष 2019 में धारा 380/411 आईपीसी के तहत दो मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है। इसके अलावा वर्ष 2020 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।
पुलिस ने यह भी बताया है कि आरोपी के खिलाफ पहले मंदिर और अन्य स्थानों पर चोरी की घटनाओं को लेकर गैंगस्टर की कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में इस मामले की जांच में उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
पुलिस टीम ने 48 घंटे में किया खुलासा
मामले के खुलासे में बाजारखाला पुलिस की टीम के साथ सर्विलांस सेल की भी भूमिका रही। पुलिस टीम में इंस्पेक्टर सुधीर कुमार अवस्थी, उपनिरीक्षक विजय कुमार, उपनिरीक्षक आशुतोष मौर्य, उपनिरीक्षक अखिलेश सिंह, उपनिरीक्षक बृजेश यादव, हेड कांस्टेबल वीर सिंह, कांस्टेबल राम सिंह और कांस्टेबल शैलेन्द्र यादव शामिल रहे।
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी को जोड़ते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी कर चोरी का सामान बरामद किया गया।
धार्मिक स्थल की सुरक्षा पर भी सवाल
इस घटना ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। मंदिर में चोरी करने वाला आरोपी पहले वहां सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुका था। ऐसे में उसे मंदिर की व्यवस्था और अंदर रखे सामान की जानकारी होना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि पुलिस की कार्रवाई से चोरी का माल बरामद हो गया है, लेकिन ऐसी घटनाएं मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी दिखाती हैं। खासकर ऐसे स्थान जहां धार्मिक महत्व की वस्तुओं के साथ कीमती धातु से बने सामान मौजूद हों, वहां सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत रखना जरूरी है।
फिलहाल बाजारखाला पुलिस ने आरोपी संजय शुक्ला पुत्र लल्लूराम शुक्ला, निवासी ग्राम जहांपुर, थाना महोली, जनपद सीतापुर, उम्र करीब 45 वर्ष, को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी भी की गई है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
नोट: यह खबर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी प्रेस नोट के आधार पर तैयार की गई है। आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस की जांच और रिकॉर्ड पर आधारित हैं। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालय की कार्यवाही के बाद तय होगी।
यह खबर भी पढ़ें: लखनऊ में अतिक्रमण और गंदगी के खिलाफ नगर निगम का सघन अभियान













