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जिस वेब सीरीज ने ओटीटी की दुनिया में अपराध, सत्ता, बदले और देसी अंदाज की एक अलग पहचान बनाई, वह अब सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी है। बात हो रही है ‘Mirzapur: The Movie’ की। पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी और रवि किशन जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म के साथ सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या ओटीटी पर वर्षों से लोकप्रिय रही ‘मिर्जापुर’ की दुनिया बड़े पर्दे पर भी दर्शकों को उसी तरह आकर्षित कर पाएगी? शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़े और दर्शकों की प्रतिक्रिया फिलहाल इस सवाल का जवाब काफी हद तक ‘हां’ में देती दिखाई दे रही है।

‘Mirzapur: The Movie’ का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है। फिल्म को पुनीत कृष्णा ने लिखा है, जबकि रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर इसके निर्माता हैं। यह फिल्म Amazon MGM Studios और Excel Entertainment की प्रस्तुति है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अखंडानंद त्रिपाठी यानी कालीन भैया के रूप में नजर आते हैं, जबकि अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु मुन्ना त्रिपाठी की भूमिका में लौटे हैं। फिल्म में रवि किशन और जितेंद्र कुमार समेत कुछ नए चेहरे भी फ्रेंचाइजी की दुनिया का हिस्सा बने हैं।

क्या है ‘Mirzapur: The Movie’ की कहानी?

फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सीधे तौर पर वेब सीरीज के तीसरे सीजन के बाद की कहानी को आगे नहीं बढ़ाती। निर्माताओं ने ‘मिर्जापुर’ की टाइमलाइन के भीतर मौजूद एक ऐसे अध्याय को बड़े पर्दे पर पेश किया है, जिसे दर्शकों ने पहले नहीं देखा था।

यही वजह है कि फिल्म पुराने किरदारों को एक अलग संदर्भ में देखने का मौका देती है। कालीन भैया, गुड्डू, मुन्ना, गोलू और बीना जैसे किरदारों के बीच सत्ता, परिवार, हिंसा और निजी महत्वाकांक्षा का संघर्ष फिल्म के केंद्र में रहता है।

निर्माताओं के मुताबिक फिल्म को इस तरह बनाया गया है कि ‘मिर्जापुर’ से परिचित दर्शक इसमें कई पुराने संदर्भों और संकेतों को पहचान सकें, जबकि कहानी को एक स्वतंत्र सिनेमाई अनुभव की तरह भी देखा जा सके। गुरमीत सिंह ने भी इसे एक नई कहानी बताया है, जिसमें फ्रेंचाइजी के पुराने संसार के भीतर कई नए स्तर जोड़े गए हैं।

कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना की वापसी बनी सबसे बड़ी ताकत

‘मिर्जापुर’ की लोकप्रियता में कहानी जितनी महत्वपूर्ण रही है, उससे कहीं अधिक उसके किरदारों का योगदान रहा है। कालीन भैया का ठहरा हुआ अंदाज, गुड्डू पंडित की आक्रामकता और मुन्ना त्रिपाठी की सनक—इन तीनों ने मिलकर फ्रेंचाइजी को उसकी अलग पहचान दी।

फिल्म में पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया वाला किरदार फिर से उसी प्रभाव के साथ सामने आता है। पंकज त्रिपाठी का अभिनय फिल्म की प्रमुख खूबियों में गिना जा रहा है। दूसरी तरफ अली फजल गुड्डू के किरदार में फिल्म की ऊर्जा को बनाए रखते हैं।

दिव्येंदु की मौजूदगी खास तौर पर उन दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण है जिन्होंने मुन्ना त्रिपाठी के किरदार को पहले सीजन से पसंद किया है। ‘मिर्जापुर’ की दुनिया में मुन्ना का किरदार भले ही विवादित रहा हो, लेकिन दर्शकों के बीच उसकी लोकप्रियता को नकारना मुश्किल है।

रसिका दुग्गल की बीना और श्वेता त्रिपाठी की गोलू भी कहानी के भावनात्मक और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करती हैं।

फिल्म में क्या नया है?

फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि वह पुरानी सीरीज की नकल न बन जाए। निर्माताओं ने इसी वजह से कहानी को एक अलग समय और परिस्थिति में रखा है।

फिल्म में फ्रेंचाइजी के परिचित तत्व मौजूद हैं—सत्ता की भूख, बदला, हिंसा, परिवार के भीतर संघर्ष, अपराध की राजनीति और स्थानीय प्रभाव। लेकिन इन्हें तीन घंटे से ज्यादा लंबे सिनेमाई फॉर्मेट में पेश करने की कोशिश की गई है।

रवि किशन की एंट्री भी फिल्म में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आती है। उनका किरदार बाब्बन यादव ‘मिर्जापुर’ के स्थापित किरदारों के सामने एक नया खतरा पैदा करता है। रवि किशन ने प्रमोशनल बातचीत में अपने किरदार को पहले निभाए गए रोल्स से काफी अलग बताया है।

3 घंटे 17 मिनट की लंबाई: ताकत या कमजोरी?

यहीं पर फिल्म की सबसे बड़ी आलोचना सामने आती है।

‘Mirzapur: The Movie’ का रनटाइम करीब 3 घंटे 17 मिनट है और इसे A certificate मिला है।

ओटीटी सीरीज में लंबी कहानी और कई समानांतर ट्रैक दर्शकों को आसानी से स्वीकार्य होते हैं क्योंकि दर्शक एपिसोड के हिसाब से कहानी देख सकते हैं। लेकिन सिनेमाघर में तीन घंटे से ज्यादा की फिल्म से गति और कसाव की उम्मीद बढ़ जाती है।

कुछ समीक्षकों ने भी फिल्म की लंबाई को इसकी कमजोरी माना है। India Today की समीक्षा के मुताबिक फिल्म में इतना कुछ समेटने की कोशिश की गई है कि कुछ जगह कहानी जरूरत से ज्यादा फैली हुई महसूस होती है। समीक्षा में यह भी कहा गया कि फिल्म में कई मजबूत हिस्से हैं, लेकिन कुछ दृश्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संपादन को और कसा जा सकता था।

यानी ‘मिर्जापुर’ के कट्टर प्रशंसक लंबाई को नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन सामान्य दर्शक को कुछ हिस्सों में फिल्म धीमी लग सकती है।

डायलॉग और म्यूजिक फिर पुराने रंग में

‘मिर्जापुर’ की पहचान उसके डायलॉग से भी रही है और फिल्म इस विरासत को बरकरार रखने की कोशिश करती है।

फिल्म में वही देसी भाषा, व्यंग्य और आक्रामक संवाद सुनने को मिलते हैं, जिनके कारण वेब सीरीज के कई डायलॉग सोशल मीडिया और आम बातचीत का हिस्सा बन गए थे।

म्यूजिक भी फिल्म के माहौल को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। रैप और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के एक्शन और गैंगस्टर टोन को मजबूत करते हैं। ‘Saansein Ki Mala’ का इस्तेमाल फिल्म को एक अलग भावनात्मक रंग देता है। India Today की समीक्षा ने भी संगीत, रैप ट्रैक और क्लाइमैक्स को फिल्म के प्रभावी हिस्सों में गिना है।

दर्शकों को कैसी लगी फिल्म?

शुरुआती दर्शक प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक दिखाई दे रही है।

BookMyShow पर फिल्म को 9.2/10 की रेटिंग दिखाई गई है और 38 हजार से अधिक वोट दर्ज हो चुके हैं। यूजर रिव्यू में ‘Blockbuster’, ‘Great Acting’, ‘Super Direction’, ‘Awesome Story’ और ‘Wellmade’ जैसे टैग बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि ऑनलाइन यूजर रेटिंग को अंतिम फिल्म समीक्षा नहीं माना जा सकता, लेकिन यह आंकड़ा इस बात का संकेत जरूर देता है कि फ्रेंचाइजी का fan base सिनेमाघरों तक पहुंचा है।

दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया में खास तौर पर कलाकारों का अभिनय, क्लाइमैक्स, डायलॉग और पुराने किरदारों की वापसी चर्चा में है।

बॉक्स ऑफिस पर ‘मिर्जापुर’ का भौकाल

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष फिलहाल बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन है।

रिलीज के पहले दिन से ही फिल्म ने अच्छी शुरुआत की। Sacnilk के आंकड़ों का हवाला देते हुए NDTV ने बताया कि पहले दिन फिल्म ने करीब 25.75 करोड़ रुपये नेट, दूसरे दिन 32 करोड़ रुपये और तीसरे दिन 36 करोड़ रुपये कमाए। इस तरह तीन दिनों में भारत में फिल्म की नेट कमाई लगभग 93.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। घरेलू ग्रॉस कलेक्शन करीब 112.35 करोड़ रुपये बताया गया।

यानी रविवार तक फिल्म 100 करोड़ रुपये के घरेलू ग्रॉस आंकड़े को पार कर चुकी थी।

वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस की बात करें तो अलग-अलग ट्रेड रिपोर्टों में तीन दिन के बाद आंकड़ा करीब 132 करोड़ रुपये बताया गया है। Indian Express ने भी फिल्म के पहले वीकेंड को 132 करोड़ रुपये से अधिक के वर्ल्डवाइड ग्रॉस के साथ रिपोर्ट किया है।

हालांकि अलग-अलग ट्रेड ट्रैकर्स के आंकड़ों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन सभी रिपोर्टों में एक बात समान है—फिल्म की शुरुआत मजबूत रही है।

2026 की बड़ी ओपनिंग वाली फिल्मों में शामिल

फिल्म का ओपनिंग वीकेंड भी इसे साल की चर्चित फिल्मों में ला चुका है।

Bollywood Hungama के अनुसार फिल्म ने 90.95 करोड़ रुपये का ओपनिंग वीकेंड दर्ज किया और 2026 की बड़ी ओपनिंग वीकेंड फिल्मों में जगह बनाई। वहीं अन्य ट्रेड रिपोर्टों ने तीन दिन के वर्ल्डवाइड कलेक्शन को 132 करोड़ रुपये से अधिक बताया है।

यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘मिर्जापुर’ मूल रूप से एक OTT franchise है। थिएटर में किसी streaming franchise को इतने बड़े दर्शक आधार के साथ उतारना अपने आप में एक प्रयोग था।

एडवांस बुकिंग ने पहले ही दे दिया था संकेत

फिल्म के रिलीज से पहले ही इसकी मांग दिखाई देने लगी थी। रिपोर्टों के अनुसार रिलीज से पहले 1.6 लाख से अधिक टिकटों की एडवांस बुकिंग हो चुकी थी। कुछ बड़े शहरों में टिकटों की कीमत लगभग 200 रुपये से लेकर 900 रुपये तक देखी गई।

यह बताता है कि दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सिर्फ फिल्म देखने के लिए नहीं, बल्कि ‘मिर्जापुर’ के किरदारों को बड़े पर्दे पर देखने के लिए टिकट खरीदने को तैयार था।

क्या ‘Mirzapur: The Movie’ सफल प्रयोग है?

फिलहाल शुरुआती आंकड़े इसे सफल प्रयोग की तरफ इशारा करते हैं।

OTT पर बनी किसी लोकप्रिय सीरीज के लिए थिएटर में वही असर पैदा करना आसान नहीं होता। OTT दर्शक अपने घर में आराम से कहानी देखते हैं, जबकि थिएटर टिकट, यात्रा और समय की अतिरिक्त लागत दर्शक से ज्यादा प्रतिबद्धता मांगते हैं।

इसके बावजूद ‘Mirzapur: The Movie’ ने दर्शकों को थिएटर तक खींचा है। इसका सबसे बड़ा कारण फिल्म की कहानी से पहले उसकी ब्रांड वैल्यू है।

दर्शक कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना को सिर्फ किरदारों की तरह नहीं देखते। इन किरदारों के साथ वर्षों की दर्शकीय पहचान जुड़ी हुई है। फिल्म ने इसी भावनात्मक जुड़ाव को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है।

क्या यह फिल्म हर दर्शक के लिए है?

शायद नहीं।

अगर आपने ‘Mirzapur’ के तीनों सीजन देखे हैं तो फिल्म का अनुभव ज्यादा बेहतर हो सकता है। पुराने किरदारों, रिश्तों और घटनाओं की जानकारी होने के कारण फिल्म में छिपे संदर्भों को समझना आसान होगा।

लेकिन अगर आपने सीरीज कभी नहीं देखी है तो फिल्म की दुनिया और किरदारों के बीच के पुराने संबंधों को समझने में मुश्किल हो सकती है।

इसलिए नए दर्शकों के लिए पहले ‘Mirzapur’ के पुराने सीजन देखना ज्यादा बेहतर विकल्प रहेगा।

अंतिम फैसला

‘Mirzapur: The Movie’ को एक ऐसी फिल्म कहा जा सकता है जो अपने दर्शकों को पहचानती है और उन्हें वही दुनिया वापस देने की कोशिश करती है जिसके लिए उन्होंने फ्रेंचाइजी को पसंद किया था।

फिल्म में नया भी है और पुराना भी। कालीन भैया का रौब, गुड्डू की आक्रामकता, मुन्ना की मौजूदगी, गोलू और बीना की कहानी, नए किरदारों की एंट्री और सत्ता की वही पुरानी लड़ाई—ये सब मिलकर फिल्म को ‘मिर्जापुर’ का विस्तार बनाते हैं।

कमजोरी मुख्य रूप से इसकी लंबाई और कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा फैला हुआ स्क्रीनप्ले है। तीन घंटे से ज्यादा की फिल्म को और कसकर पेश किया जाता तो इसका प्रभाव शायद और मजबूत हो सकता था।

लेकिन अगर सवाल यह है कि क्या ‘मिर्जापुर’ का जादू OTT से निकलकर थिएटर तक पहुंच पाया, तो शुरुआती बॉक्स ऑफिस और दर्शक प्रतिक्रिया को देखते हुए जवाब काफी हद तक सकारात्मक है।

हमारी रेटिंग: 3.5/5

कहानी: 3.5/5
अभिनय: 4.5/5
डायलॉग: 4.5/5
एक्शन: 4/5
म्यूजिक/BGM: 4/5
स्क्रीनप्ले: 3.5/5
क्लाइमैक्स: 4/5
थिएटर एक्सपीरियंस: 4/5
कुल मिलाकर: 3.5/5

‘Mirzapur: The Movie’ उन दर्शकों के लिए खास तौर पर देखने लायक है जिन्होंने इस फ्रेंचाइजी के साथ लंबा सफर तय किया है। फिल्म का असली मजा सिर्फ उसकी कहानी में नहीं, बल्कि उन चेहरों को बड़े पर्दे पर दोबारा देखने में है, जिन्होंने भारतीय OTT कंटेंट की एक पूरी पीढ़ी पर अपनी छाप छोड़ी है।

बॉक्स ऑफिस पर शुरुआती प्रदर्शन यह भी संकेत देता है कि अगर किसी OTT फ्रेंचाइजी के पास मजबूत किरदार, वफादार दर्शक और थिएटर के अनुरूप कहानी हो, तो वह डिजिटल स्क्रीन से निकलकर बड़े पर्दे पर भी बड़ा कारोबार कर सकती है।

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