लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सेना (भारत) और अखंड हिंदू वाहिनी ने सनातन, हिंदू एकता, आरक्षण और मंदिरों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य हिंदू समाज को जात-पात के भेदभाव से ऊपर उठाकर एकजुट करना और सनातन से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार, भारतीय जनता पार्टी और संत समाज को लेकर भी कई तीखे सवाल उठाए।
संगठनों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ‘हिंदू हुंकार रैली’ आयोजित की जाएगी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पहली रैली 27 सितंबर को पुवायां, जिला शाहजहांपुर से शुरू करने की घोषणा की गई है। हालांकि, प्रेस वार्ता के वीडियो में एक वक्ता ने पहली रैली के लिए सहारनपुर का उल्लेख किया है। ऐसे में कार्यक्रम के अंतिम स्थान की आधिकारिक पुष्टि आयोजकों की ओर से किया जाना बाकी है।
सनातन की रक्षा को बताया मुख्य उद्देश्य
प्रेस वार्ता की शुरुआत में वक्ताओं ने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य सनातन की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार को आगे बढ़ाना है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र धारण करने वाले कुछ लोग ही सनातन के विरुद्ध काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी संतों से अपील की कि वे सरकार की कथित निर्भरता से बाहर निकलकर सनातन से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी भूमिका निभाएं।
वक्ताओं ने कहा कि संतों की जिम्मेदारी केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज को दिशा देने, शास्त्रों का ज्ञान बढ़ाने और सामाजिक मुद्दों पर मार्गदर्शन देने की भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री हर विधानसभा, जिले और गांव की परिस्थितियों पर व्यक्तिगत रूप से नजर नहीं रख सकते। इसलिए संगठन और पार्टी से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है कि वे जमीनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएं।
मंदिर और मस्जिद के मुद्दे पर भी सवाल
प्रेस वार्ता में सहारनपुर की मस्जिद से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब किसी मस्जिद को नुकसान पहुंचने की बात सामने आती है तो राजनीतिक दल और विभिन्न संगठन सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन मंदिरों से जुड़े मामलों पर उसी स्तर पर आवाज नहीं उठाई जाती।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि किसी मस्जिद के टूटने का विरोध किया जाता है तो मंदिरों को नुकसान पहुंचने के मामलों पर भी आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल के साथ अन्याय होने पर समान रूप से आवाज उठाना जरूरी है।
संगठन ने संत समाज से इस तरह के मामलों में सबसे पहले आवाज उठाने की अपील की। वक्ताओं के मुताबिक, संतों के एकजुट होने से सनातन समाज में एकता को मजबूती मिल सकती है।
आरक्षण को लेकर संगठन की अलग राय
प्रेस वार्ता में आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए। उनका तर्क था कि गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आती और किसी भी जाति में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हो सकते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में जातिगत पहचान लगातार मजबूत होने से हिंदू समाज के भीतर विभाजन बढ़ रहा है। उन्होंने ‘जात-पात की राजनीति की विदाई’ की बात कहते हुए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को समान अवसर देने की मांग रखी।
एक वक्ता ने कहा कि समाज में पहले पहचान हिंदू और सनातनी के रूप में थी, लेकिन अब लोगों की पहचान ब्राह्मण, सवर्ण और दूसरी जातिगत श्रेणियों के रूप में ज्यादा की जा रही है। संगठन ने इसे हिंदू एकता के लिए चुनौती बताया।
बीजेपी पर लगाए तीखे आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी को लेकर भी वक्ताओं ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बीजेपी खुद को हिंदुओं की हितैषी पार्टी के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन संगठन के अनुसार हिंदू समाज से जुड़े कई प्रमुख मुद्दे अब भी लंबित हैं।
वक्ताओं ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने, सनातन बोर्ड के गठन, धर्मार्थ कल्याण बोर्ड बनाने तथा पंजीकृत मंदिरों के पुजारियों को मासिक मानदेय दिए जाने जैसी मांगें उठाईं।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की ओर से कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनकी अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। वक्ताओं ने सरकार से सवाल किया कि यदि लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बीजेपी के खिलाफ लगाए गए ये आरोप प्रेस वार्ता में योगी सेना (भारत) और अखंड हिंदू वाहिनी के वक्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। प्रेस वार्ता में मौजूद संगठनों ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
‘हिंदू धर्म में ठेकेदारी प्रथा नहीं’

अखंड हिंदू वाहिनी और योगी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि हिंदू धर्म किसी एक व्यक्ति या संगठन की ‘ठेकेदारी’ नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को हिंदू धर्म का ठेकेदार बनाना नहीं बल्कि अलग-अलग वर्गों और जातियों को एक मंच पर लाना है।
वक्ताओं ने दावा किया कि प्रस्तावित हिंदू हुंकार रैली में विभिन्न जातियों और सामाजिक वर्गों के लोगों को साथ लाने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना था कि संगठन की प्राथमिकता हिंदू समाज में आपसी भेदभाव कम करना और एकता को मजबूत करना है।
9 सितंबर को सुझाव पत्र देने की घोषणा
प्रेस वार्ता में संगठनों ने यह भी बताया कि सभी विधानसभाओं के लिए एक सुझाव पत्र तैयार किया गया है। वीडियो में वक्ताओं ने कहा कि 9 सितंबर को यह सुझाव पत्र संबंधित स्तर पर देने की योजना है।
संगठन के अनुसार इस सुझाव पत्र में सामाजिक और धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ हिंदू समाज की समस्याओं को लेकर सुझाव शामिल किए गए हैं। वक्ताओं ने दोहराया कि जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर गरीब और जरूरतमंद लोगों के हितों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
पूरे उत्तर प्रदेश में रैली का दावा
योगी सेना (भारत) और अखंड हिंदू वाहिनी ने कहा कि हिंदू हुंकार रैली को केवल एक जिले तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संगठन का दावा है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों को अभियान के तहत कवर किया जाएगा।
रैली का घोषित उद्देश्य हिंदू समाज को एक मंच पर लाना, जातिगत भेदभाव के खिलाफ संदेश देना और सनातन से जुड़े मुद्दों को उठाना बताया गया है।
प्रेस वार्ता में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज के भीतर जातिगत विभाजन का राजनीतिक असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है। हालांकि, रैली और संगठन के कार्यक्रमों को लेकर उनकी ओर से किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से आगे की रणनीति का विस्तृत खाका स्पष्ट नहीं किया गया।
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने मंदिर, गौ संरक्षण, सनातन बोर्ड, पुजारियों के मानदेय, आरक्षण और हिंदू एकता जैसे मुद्दों को एक साथ उठाया। उन्होंने सरकार से इन विषयों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
संगठन का कहना है कि केवल धार्मिक नारों या चुनावी राजनीति से हिंदू समाज की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नीतिगत स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है।
इस पूरी प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने अपने विचारों और आरोपों को तीखे अंदाज में रखा। अब देखना होगा कि प्रस्तावित हिंदू हुंकार रैली को प्रदेश के विभिन्न जिलों में कितना समर्थन मिलता है और सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
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