लखनऊ, 7 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति रविवार को उस समय गरमा गई जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय को सहारनपुर जाने के दौरान लखनऊ में पुलिस ने रोक लिया। कांग्रेस का आरोप है कि सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले के पीड़ितों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मिलने जा रहे अजय राय को माल एवेन्यू चौराहे पर भारी पुलिस बल ने रोक दिया। विरोध के बाद अजय राय समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां कई घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
घटना के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए योगी सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि पूरे घटनाक्रम ने सहारनपुर मस्जिद विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
माल एवेन्यू चौराहे पर रोका गया काफिला
कांग्रेस के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अजय राय रविवार दोपहर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से सहारनपुर के लिए रवाना हुए थे। पार्टी का कहना है कि उनका उद्देश्य कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर मस्जिद ध्वस्तीकरण प्रकरण में प्रभावित लोगों और मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात करना था।
कांग्रेस के मुताबिक प्रदेश मुख्यालय से निकलते ही माल एवेन्यू चौराहे पर पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उनके काफिले को रोक दिया। पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मौके पर कुछ ही देर में बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक जुट गए और सड़क पर नारेबाजी शुरू हो गई। बढ़ते विरोध के बीच अजय राय सड़क पर धरने की मुद्रा में बैठ गए और सहारनपुर जाने की अपनी जिद पर अड़े रहे।
सड़क पर धरने के बाद हिरासत
कांग्रेस का आरोप है कि धरने के दौरान पुलिस ने अजय राय सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया और उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया।
काफी देर तक पुलिस लाइन में रखने के बाद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया।
घटना के दौरान पूर्व विधायक भगौती प्रसाद चौधरी, पूर्व विधायक इंदल रावत, असीम वकार, बद्री विशाल तिवारी, सलीम अख्तर, अब्दुल्ला शेर खान, मौलाना इस्लाही, डॉ. अलीमुल्लाह खान, अरशद आजमी, डॉ. उमा शंकर पाण्डेय, सुरेंद्र यादव, ओंकारनाथ सिंह, द्विजेंद्र त्रिपाठी, राजेश जायसवाल समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
अजय राय का सरकार पर हमला
रिहाई के बाद अजय राय ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जनआकांक्षाओं पर पूरी तरह विफल साबित हुई है और यही कारण है कि वह विपक्षी नेताओं को पीड़ितों तक पहुंचने से रोक रही है।
अजय राय ने कहा कि जहां भी कांग्रेस नेता जनता की समस्याओं को सुनने या पीड़ितों के साथ खड़े होने जाते हैं, वहां उन्हें प्रशासन द्वारा रोक दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि रास्ते रोके जा सकते हैं, लेकिन आवाज को दबाया नहीं जा सकता और कांग्रेस पार्टी पीड़ितों की लड़ाई आगे भी लड़ती रहेगी।
सहारनपुर जाने का उद्देश्य क्या था?
कांग्रेस के अनुसार पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण प्रकरण के बाद स्थानीय लोगों से मुलाकात करने जा रहा था।
पार्टी का कहना है कि प्रभावित परिवारों की स्थिति जानने और घटनाक्रम की वास्तविक जानकारी लेने के लिए यह दौरा तय किया गया था।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में तत्काल विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया कि काफिले को किन कारणों से रोका गया।
पुलिस लाइन से निकलकर पहुंचे इको गार्डेन
रिहा होने के बाद अजय राय सीधे लखनऊ के इको गार्डेन पहुंचे।
यहां उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग पिछले छह दिनों से अनिश्चितकालीन धरना चला रहा था और रविवार को धरने का सातवां दिन था।
अजय राय ने धरनास्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक अधिकारों के मुद्दों पर लगातार संघर्ष जारी रखेगी।
धरने का मुद्दा क्या है?
इको गार्डेन में चल रहे धरने का संबंध उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई एक राजनीतिक घटना से जुड़ा है।
कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मंच का कथित रूप से शुद्धिकरण किए जाने की घटना हुई थी।
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन और सांसद तनुज पुनिया के नेतृत्व में चल रहे इस धरने में पार्टी की मांग है कि इस मामले में दर्ज एफआईआर की समीक्षा की जाए और जिन लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है, उनके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर दुर्भावनापूर्ण है और उसे निरस्त किया जाना चाहिए।
विपक्ष बनाम सरकार की नई राजनीतिक लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सहारनपुर मस्जिद प्रकरण अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है।
कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की आवाज दबाने का मुद्दा बना रही है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर अपने कदमों को उचित ठहरा सकती है।
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
कांग्रेस ने उठाए ये प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल उठाए हैं।
- विपक्षी नेताओं को पीड़ितों से मिलने से क्यों रोका गया?
- क्या लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ?
- प्रशासन ने रोकने का आधार क्या था?
- हिरासत में लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पार्टी का कहना है कि इन सवालों का जवाब सरकार को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रेस नोट उपलब्ध नहीं था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई पर चर्चा तेज है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन सुरक्षा या कानून-व्यवस्था का हवाला देकर विपक्षी नेताओं की आवाजाही सीमित करता है, तो ऐसे फैसलों पर राजनीतिक बहस स्वाभाविक रूप से तेज हो जाती है।
आगे क्या?
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह सहारनपुर मस्जिद प्रकरण और विपक्षी नेताओं को रोके जाने के मुद्दे को आगे भी उठाएगी।
वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण देता है या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि लखनऊ में अजय राय की गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में विधानसभा से लेकर सड़क तक सुनाई दे सकती है।
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