लखनऊ, 7 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में जलभराव के बीच अब बाढ़ के बाद पैदा होने वाले संभावित जनस्वास्थ्य संकट को लेकर सियासत तेज होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जन-व्यथा निस्तारण समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वास्थ्य निगरानी और रोकथाम के उपाय शुरू करने की मांग की है।
कांग्रेस की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि बाढ़ और जलभराव के बाद दूषित पेयजल, गंदगी, मच्छरों की बढ़ती संख्या और संक्रमण के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। समिति ने सरकार से अपील की है कि राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू की जाए। पत्र में इस पूरे विषय को केवल बाढ़ राहत तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक “उत्तर प्रदेश मानसून जनस्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन संकट” के रूप में देखने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में क्या कहा गया?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जन-व्यथा निस्तारण समिति के सचिव संजय शर्मा की ओर से 7 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में प्रदेश में मौजूदा बारिश और बाढ़ की परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्से लगातार बारिश, नदियों के उफान और जलभराव की स्थिति से गुजर रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश को विशेष रूप से संवेदनशील बताते हुए पत्र में नेपाल से आने वाली जलधाराओं का भी उल्लेख किया गया है। समिति के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ के कारण सीमापार जलप्रवाह से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
कांग्रेस समिति ने अपने पत्र में मुख्य चिंता यह जताई है कि बाढ़ का संकट केवल पानी के बढ़ने या संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं रहता। पानी जमा होने और बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
बाढ़ के बाद किन बीमारियों का खतरा बताया?
पत्र में दावा किया गया है कि बारिश और जलभराव के बाद दूषित पेयजल, गंदगी, मच्छरों और संक्रमण के कारण हैजा, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और कंजंक्टिवाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा समिति ने प्रदेश में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों का भी उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर तैयारी की जरूरत बताई है। पत्र में पशुधन से संबंधित लंपी स्किन डिजीज तथा खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों की रोकथाम और निगरानी को भी जरूरी बताया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि इन संभावित संकटों को अचानक सामने आने वाली घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समिति के मुताबिक मानसून के दौरान हर वर्ष बाढ़ और जलभराव की परिस्थितियां बनती हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को पहले से तैयार रहने की जरूरत है।
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखे 10 सुझाव
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कांग्रेस की जन-व्यथा निस्तारण समिति ने कुल 10 प्रमुख कदम उठाने की मांग की है। इनका फोकस स्वास्थ्य निगरानी, सुरक्षित पेयजल, मच्छर नियंत्रण, पशु स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की तैयारी पर है।
1. बाढ़ प्रभावित जिलों में तत्काल स्वास्थ्य निगरानी
समिति ने मांग की है कि बाढ़ प्रभावित जिलों में तत्काल जनस्वास्थ्य निगरानी अभियान शुरू किया जाए। संभावित संक्रामक बीमारियों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग को विशेष रूप से सक्रिय करने की मांग की गई है।
इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारी के मामलों को शुरुआती स्तर पर पहचानना और जरूरत के अनुसार उपचार एवं रोकथाम की व्यवस्था करना है।
2. सुरक्षित पेयजल और क्लोरीनेशन पर जोर
पत्र में दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। कांग्रेस समिति ने पेयजल की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
बाढ़ के दौरान पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका को देखते हुए समिति ने इसे तत्काल प्राथमिकता देने की अपील की है।
3. डेंगू-मलेरिया की रोकथाम पहले से शुरू करने की मांग
कांग्रेस ने मच्छर जनित बीमारियों को लेकर भी सरकार से सक्रिय कदम उठाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जलभराव खत्म होने का इंतजार करने के बजाय मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए पहले से काम शुरू किया जाना चाहिए।
मच्छर नियंत्रण, लार्वा की निगरानी, फॉगिंग और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
4. कंजंक्टिवाइटिस और संक्रमण की निगरानी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों में भीड़भाड़ के बीच आंखों के संक्रमण और अन्य संक्रामक बीमारियों की निगरानी करने की मांग की गई है।
समिति ने जरूरत पड़ने पर संक्रमित लोगों के लिए अलग उपचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही है।
5. H1N1 से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन
पत्र में H1N1 के मामलों का हवाला देते हुए प्रदेश के प्रत्येक मंडल और जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का तत्काल आकलन कराने की मांग की गई है।
कांग्रेस ने जांच, पृथक उपचार, ICU, ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा करने को कहा है।
6. पशु रोगों की रोकथाम और टीकाकरण
कांग्रेस समिति ने मानव स्वास्थ्य के साथ पशु स्वास्थ्य को भी बाढ़ प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
पत्र में लंपी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका जैसे पशु रोगों की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान तेज करने, पशु चिकित्सा शिविर लगाने और पशुओं के आवागमन पर निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है।
7. बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को राहत
बाढ़ के कारण विस्थापित होने वाले पशुओं के लिए चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की मांग भी पत्र में की गई है।
इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित नमूना जांच और प्रयोगशाला परीक्षण कराने का सुझाव दिया गया है।
8. नेपाल से आने वाली जलधाराओं पर पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत करने की मांग
पूर्वी उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए समिति ने नेपाल से आने वाली जलधाराओं और गंडक, राप्ती तथा घाघरा जैसे नदी तंत्रों के लिए समयबद्ध पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
पत्र के अनुसार संवेदनशील जिलों को नदी के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी की पर्याप्त समय पहले सूचना मिलना जरूरी है, ताकि प्रशासन और स्थानीय आबादी तैयारी कर सके।
9. मानसून-पूर्व तैयारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
कांग्रेस ने बाढ़ से जुड़े कामों की जिला स्तर पर समीक्षा कराने की मांग भी की है।
पत्र में बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी, तटबंधों की मरम्मत, चिकित्सा तैयारियों और पशु टीकाकरण जैसे कार्यों की समीक्षा का सुझाव दिया गया है। जहां तैयारी में कमी पाई जाए, वहां जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
10. बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी स्वास्थ्य निगरानी
कांग्रेस की मांगों में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक बाढ़ के बाद लंबे समय तक स्वास्थ्य निगरानी जारी रखने का है।
पत्र में कहा गया है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद केवल आर्थिक नुकसान का आकलन पर्याप्त नहीं होना चाहिए। समिति के मुताबिक कुछ बीमारियां बाढ़ की स्थिति समाप्त होने के बाद भी सामने आ सकती हैं, इसलिए कई सप्ताह तक स्वास्थ्य निगरानी जारी रखने की जरूरत है।
राहत से आगे स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
कांग्रेस के इस पत्र का मुख्य संदेश यही है कि बाढ़ को केवल राहत और बचाव की चुनौती मानकर कार्रवाई सीमित नहीं की जानी चाहिए।
समिति ने स्वास्थ्य, सिंचाई, नगर निकाय, पेयजल, पशुपालन और आपदा प्रबंधन विभागों को एक साझा कार्ययोजना के तहत सक्रिय करने की मांग की है। पत्र में सरकार से उच्चस्तरीय समीक्षा और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।
पूर्वी यूपी पर विशेष नजर की मांग
पत्र में पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। नेपाल से आने वाली जलधाराओं के कारण इस क्षेत्र में नदी जलस्तर पर असर पड़ने की बात कांग्रेस समिति ने कही है।
ऐसे में बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए समय रहते चेतावनी, राहत शिविरों में स्वास्थ्य व्यवस्था, सुरक्षित पेयजल और संक्रमण नियंत्रण जैसे उपायों को महत्वपूर्ण बताया गया है।
अब सरकार की तैयारी पर निगाह
कांग्रेस के पत्र के बाद अब निगाह राज्य सरकार और संबंधित विभागों की तैयारियों पर रहेगी। खासतौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य निगरानी, पेयजल जांच, मच्छर नियंत्रण और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
यह पत्र ऐसे समय आया है जब प्रदेश में मानसून और बाढ़ से जुड़ी परिस्थितियां राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
हालांकि पत्र में स्वास्थ्य संबंधी कई संभावित खतरों का उल्लेख किया गया है, लेकिन इन सभी बीमारियों के संबंध में राज्य में वर्तमान स्थिति या मामलों की संख्या का विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों और संभावनाओं को कांग्रेस समिति की चिंता और मांग के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस का संदेश—संकट आने का इंतजार न हो
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कांग्रेस ने सरकार से आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी, रोकथाम और निगरानी को प्राथमिकता देने की अपील की है।
समिति के अनुसार बाढ़ के साथ आने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। उसका जोर इस बात पर है कि राहत शिविरों से लेकर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी लगातार जारी रहे और बाढ़ के बाद के चरण को भी आपदा प्रबंधन का हिस्सा माना जाए।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री को भेजा गया यह पत्र प्रदेश में बाढ़ के बाद संभावित स्वास्थ्य चुनौतियों को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार के सामने रखा गया एक विस्तृत मांगपत्र है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इन सुझावों पर किस तरह की कार्रवाई करते हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर क्या नई व्यवस्था लागू की जाती है।
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