लखनऊ, 12 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा सवाल पूछने का प्रयास अब सियासी बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से प्रेस वार्ता में सवाल लेने और उनका जवाब देने का आग्रह करती नजर आ रही हैं। इसी घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रेस वार्ता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब केवल बयान दिया जाना है और पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार नहीं है, तो प्रेस वार्ता का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर देना चाहिए।
महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री से क्या कहा?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछने का प्रयास करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कहती सुनाई देती हैं कि यह प्रेस वार्ता है, इसलिए सवालों के जवाब भी दिए जाने चाहिए और पत्रकारों के प्रश्न लिए जाने चाहिए।
वीडियो में मुख्यमंत्री के आगे बढ़ने के बाद भी महिला पत्रकार द्वारा अपना सवाल दोहराए जाने का दृश्य दिखाई देता है। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पत्रकार के सवाल पूछने के अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने के तरीके को लेकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
वीडियो के संदर्भ में यह भी चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने महिला पत्रकार के व्यवहार पर आपत्ति जताई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे वीडियो और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, “नाम बदलने वाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है?”
उन्होंने आगे कहा कि जब सवालों के जवाब नहीं देने हैं तो प्रेस विज्ञप्ति भेजकर ही काम चलाया जा सकता है। इससे समय भी बचेगा और संवाद का सवाल भी नहीं उठेगा।
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि प्रदेश में सवालों की भरमार है, लेकिन उनके पास जवाब नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के सवालों से बचकर आगे बढ़ने को लेकर भी तंज कसा। अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट के अंत में सवाल सुनने के मूड को लेकर भी कटाक्ष किया।
‘प्रेस वार्ता’ बनाम ‘प्रेस एकालाप’ पर बहस
अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के उद्देश्य और पत्रकारों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। पत्रकारिता में प्रेस वार्ता को सरकार, राजनीतिक दलों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सवाल पूछने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
ऐसे में जब किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को सवाल पूछने का अवसर नहीं मिलता या सवालों का जवाब नहीं दिया जाता, तो उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, किसी भी प्रेस वार्ता में सवाल पूछने और जवाब देने की प्रक्रिया के दौरान मर्यादा और संवाद की गरिमा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम में महिला पत्रकार के सवाल, मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और उसके बाद अखिलेश यादव की टिप्पणी ने राजनीतिक विमर्श को नया मुद्दा दे दिया है।
किस कार्यक्रम को लेकर हुई थी प्रेस कॉन्फ्रेंस?

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ से संबंधित थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अभियान के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने अभियान की रूपरेखा रखी, जबकि भाजपा नेताओं ने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से जुड़ी उपलब्धियों पर भी चर्चा की।
सवालों के जवाब को लेकर सियासी घमासान
अखिलेश यादव की टिप्पणी को समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी के एक और उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। जहां सपा प्रमुख ने पत्रकारों के सवाल पूछने के अधिकार को मुद्दा बनाया है, वहीं इस वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता की शैली पर भी चर्चा हो रही है।
फिलहाल, महिला पत्रकार के सवाल और मुख्यमंत्री के बीच हुए इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री कार्यालय या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। ऐसे में पूरे मामले पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित पक्षों के बयान और वीडियो के पूर्ण संदर्भ के बाद ही निकाला जा सकेगा।
नई सोच नई ऊर्जा की नजर: प्रेस वार्ता का उद्देश्य केवल बयान देना नहीं, बल्कि सवालों के जरिए जनता के मुद्दों को सामने लाना भी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में पत्रकारों के सवालों और सत्ता के जवाबों के बीच संवाद कितना जरूरी है।
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