लखनऊ, 19 सितंबर 2026: डिजिटल भुगतान व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव को लेकर आम आदमी पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ ने शनिवार को राजधानी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य भवन चौराहे पर आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में व्यापारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI व्यापारी भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
AAP के व्यापार प्रकोष्ठ की ओर से जारी बयान के मुताबिक प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने किया। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और व्यापारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई।
हालांकि, UPI शुल्क को लेकर सरकार का पक्ष AAP के आरोपों से अलग है। सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार इसे उपभोक्ताओं पर लगाया गया कोई नया “UPI टैक्स” नहीं बताया गया है, बल्कि पात्र व्यापारी लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) की व्यवस्था के रूप में समझाया गया है। सरकार के मुताबिक 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान और Person-to-Person यानी P2P भुगतान MDR से बाहर रहेंगे। ऐसे में इस पूरे मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारियों के लिए इसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव पर भी चर्चा तेज हो गई है।
स्वास्थ्य भवन चौराहे पर जुटे व्यापारी और कार्यकर्ता
शनिवार को लखनऊ के स्वास्थ्य भवन चौराहे पर AAP व्यापार प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता और व्यापारी एकत्र हुए। पार्टी के अनुसार प्रदर्शन का उद्देश्य UPI से जुड़े नए MDR प्रावधान का विरोध करना और सरकार से इसे वापस लेने की मांग करना था।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और छोटे व्यापारियों की आय तथा डिजिटल भुगतान से जुड़ी लागत का मुद्दा उठाया। AAP नेताओं ने कहा कि आज छोटे दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले और विभिन्न सेवा प्रदाता डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान से जुड़ी किसी भी अतिरिक्त लागत का असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है।
प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात पार्टी की ओर से कही गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में भी प्रदर्शन और हिरासत की जानकारी सामने आई है।
मनोज मिश्रा ने सरकार की डिजिटल भुगतान नीति पर उठाए सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए AAP व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने UPI MDR को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले डिजिटल भुगतान और UPI को बढ़ावा दिया और अब उसी डिजिटल व्यवस्था से जुड़े व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
मनोज मिश्रा के मुताबिक छोटे कारोबारियों के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका कारोबार अक्सर सीमित मार्जिन पर चलता है। सब्जी विक्रेता, ठेले वाले, चाय दुकानदार, रिक्शा चालक, टैक्सी चालक और छोटे दुकानदार जैसे कारोबारियों के लिए हर अतिरिक्त लागत उनके कुल कारोबार को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि डिजिटल भुगतान केवल बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों, बाजारों और मोहल्लों में भी UPI रोजमर्रा के लेनदेन का हिस्सा बन चुका है।
AAP ने छोटे कारोबारियों के हित का मुद्दा बनाया
AAP नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान यह तर्क रखा कि छोटे व्यापारियों को पहले से ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के मुताबिक महंगाई, कारोबार की लागत, किराया, बिजली, कर्मचारियों का खर्च और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों के बीच डिजिटल भुगतान से जुड़ी अतिरिक्त लागत भी चिंता का विषय बन सकती है।
मनोज मिश्रा ने अपने भाषण में छोटे कारोबारियों और बड़े कॉरपोरेट कर्ज से जुड़े मुद्दों की तुलना करते हुए सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक नीतियों में छोटे कारोबारियों और बड़े उद्योग समूहों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है।
ये आरोप AAP नेता द्वारा प्रदर्शन के दौरान लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें सरकार की स्थापित नीति या स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
‘UPI टैक्स’ शब्द को लेकर भी विवाद
इस प्रदर्शन में AAP नेताओं ने प्रस्तावित MDR को “UPI टैक्स” कहकर संबोधित किया। हालांकि, इस शब्दावली को लेकर सरकारी पक्ष अलग है।
सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक यह सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। MDR यानी Merchant Discount Rate भुगतान प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच निर्धारित शुल्क व्यवस्था है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक से UPI भुगतान करने के लिए अलग से कोई ट्रांजैक्शन फीस लेने की व्यवस्था नहीं है।
यही अंतर इस विवाद को समझने में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दल इसे आम आदमी और व्यापारियों पर संभावित आर्थिक बोझ के रूप में देख रहे हैं, जबकि सरकारी पक्ष इसे UPI भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने से जुड़ा शुल्क ढांचा बताता है।
2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर MDR नहीं
मौजूदा सरकारी व्यवस्था के अनुसार 2,000 रुपये तक के पात्र P2M यानी व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले P2P भुगतान को भी MDR से बाहर रखा गया है।
सरकार का दावा है कि नए ढांचे से लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
यानी हर UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगने की बात सही नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यापारी लेनदेन से संबंधित है।
यह अंतर उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस के बीच “हर UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत टैक्स” जैसी धारणा पैदा हो सकती है, जबकि घोषित व्यवस्था इससे अलग है।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित है नई व्यवस्था
सरकार के अनुसार नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र P2M लेनदेन पर सामान्य MDR 0.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
सरकारी पक्ष के अनुसार इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम से जुड़े भुगतान नेटवर्क को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आर्थिक व्यवस्था तैयार करना है।
दूसरी ओर, AAP और कुछ व्यापारिक समूहों की चिंता यह है कि व्यापारी पक्ष पर आने वाली लागत अंततः छोटे कारोबारियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विरोध और व्यापारिक बहस दोनों सामने आ रहे हैं।
चुनाव के बाद शुल्क बढ़ने का दावा भी सामने आया
प्रदर्शन के दौरान मनोज मिश्रा ने आरोप लगाया कि अभी 0.4 प्रतिशत शुल्क की शुरुआत की जा रही है और भविष्य में इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद आम लोगों पर भी अधिक शुल्क का बोझ डाला जा सकता है।
हालांकि, उपलब्ध सरकारी प्रावधानों में फिलहाल आम उपभोक्ताओं पर 2 से 4 प्रतिशत UPI शुल्क लगाने की कोई घोषित व्यवस्था नहीं है। इसलिए इस दावे को AAP नेता की आशंका और राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वर्तमान सरकारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उपभोक्ता से UPI भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
GST और दूसरे करों को लेकर भी सरकार पर हमला
मनोज मिश्रा ने प्रदर्शन के दौरान GST, टोल और अन्य करों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी और आम नागरिक पहले से ही विभिन्न प्रकार के करों और खर्चों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ बड़े कारोबारी समूहों को राहत दी जाती है और दूसरी तरफ छोटे व्यापारियों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
AAP की ओर से इस प्रदर्शन को छोटे व्यापारियों के आर्थिक हितों से जोड़ते हुए इसे आगे भी जारी रखने की बात कही गई।
संजय सिंह के नेतृत्व में आंदोलन जारी रखने का ऐलान
AAP व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल सड़क तक सीमित नहीं रखेगी। उनके अनुसार पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर भी उठाया जाएगा।
मनोज मिश्रा ने पार्टी के पुराने आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि AAP ने पहले भी किसानों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन किए हैं। उन्होंने दावा किया कि UPI MDR के मुद्दे पर भी पार्टी व्यापारियों के साथ खड़ी रहेगी।
यह बयान पार्टी के राजनीतिक रुख को दर्शाता है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन तेज होने की संभावना की ओर संकेत करता है।
इरम रिज़वी ने रेहड़ी-पटरी कारोबारियों की स्थिति उठाई
प्रदर्शन के दौरान AAP लखनऊ जिलाध्यक्ष इरम रिज़वी ने छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले वालों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी पहले से ही महंगाई और स्थानीय स्तर की कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान अब व्यापार का सामान्य हिस्सा बन चुका है और किसी भी अतिरिक्त लागत का असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है।
इरम रिज़वी ने कहा कि पार्टी लखनऊ के बाजारों और अन्य इलाकों में व्यापारियों के बीच जाकर इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाएगी।
प्रदर्शन में कई AAP पदाधिकारी रहे मौजूद
AAP की ओर से जारी जानकारी के अनुसार प्रदर्शन में अवध प्रांत के उपाध्यक्ष अभिषेक प्रताप सिंह, व्यापार प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष वंश बहादुर सिंह, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव नूर सिद्दीकी, लखनऊ जिलाध्यक्ष इरम रिज़वी, प्रदेश प्रवक्ता संजीव निगम, पी.के. बाजपेई समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बाराबंकी से व्यापार प्रकोष्ठ से जुड़े लवी, रवि प्रभाकर, सुबोध और सोनू समेत अन्य कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की भी जानकारी दी गई।
प्रदर्शन के दौरान नूर सिद्दीकी ने भी UPI MDR के विरोध में अपनी बात रखी। कार्यक्रम के अंत में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात AAP की ओर से कही गई।
अब आगे क्या होगा?
UPI MDR को लेकर सामने आया विवाद केवल राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम और व्यापारियों की लागत से जुड़ा है।
एक तरफ सरकार का तर्क है कि ग्राहक के लिए UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा और 2,000 रुपये तक के अधिकांश छोटे व्यापारी भुगतान MDR से बाहर रहेंगे। दूसरी ओर AAP और कुछ व्यापारिक संगठन इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर व्यापारी पक्ष की लागत का वास्तविक असर कितना होगा।
आने वाले समय में इस मुद्दे पर व्यापारिक संगठनों, डिजिटल भुगतान कंपनियों, बैंकों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। खासकर छोटे कारोबारियों के लिए यह देखना अहम होगा कि MDR का वास्तविक प्रभाव उनके कारोबार की लागत और भुगतान व्यवस्था पर कितना पड़ता है।
निष्कर्ष
लखनऊ के स्वास्थ्य भवन चौराहे पर AAP व्यापार प्रकोष्ठ का प्रदर्शन UPI के नए MDR ढांचे को लेकर चल रही राजनीतिक और व्यापारिक बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पार्टी ने इसे छोटे व्यापारियों के हितों से जोड़ते हुए शुल्क वापस लेने की मांग की है और आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है।
वहीं सरकारी पक्ष के अनुसार 0.4 प्रतिशत MDR हर UPI भुगतान पर लागू होने वाला टैक्स नहीं है। यह 2,000 रुपये से अधिक के पात्र P2M लेनदेन से संबंधित शुल्क व्यवस्था है, जबकि P2P भुगतान और 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान इससे बाहर हैं।
इसलिए UPI को लेकर आगे की बहस में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ यह समझना भी जरूरी होगा कि नई व्यवस्था किन लेनदेन पर लागू होती है और उसका वास्तविक आर्थिक असर व्यापारियों पर कितना पड़ता है।
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