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नई दिल्ली: देश में त्योहारों के मौसम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी सेवा में शामिल होने जा रहे 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलने पर बधाई दी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अवसर केवल नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं और उनके परिवारों के जीवन में एक नई शुरुआत का भी प्रतीक है। उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और परिवार के सदस्यों को भी बधाई दी और कहा कि युवाओं की सफलता के पीछे उनकी मेहनत के साथ परिवार की तपस्या भी होती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी सेवा में आने वाले नए कर्मचारियों की भूमिका केवल अपने विभागीय दायित्वों तक सीमित नहीं है। उन्होंने युवाओं से ऐसे निर्णय लेने की अपेक्षा जताई, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को लगातार मजबूत करें। उनके मुताबिक युवा होने के कारण नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझने और उनके रास्ते की बाधाओं को कम करने की जिम्मेदारी भी इन नए सरकारी कर्मचारियों की है।

51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में त्योहारों का समय शुरू हो चुका है और इसी बीच हजारों परिवारों के लिए यह दिन नई खुशी लेकर आया है। उन्होंने बताया कि 51 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा के लिए नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं को जीवन की नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

पीएम मोदी ने कहा कि किसी युवा की सफलता में उसकी व्यक्तिगत मेहनत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इसके पीछे माता-पिता और परिवार की मेहनत और त्याग भी जुड़ा होता है। उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं और उनके परिवारों को विशेष रूप से बधाई दी।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पाने वाले युवा ऐसे समय में भारत सरकार का हिस्सा बन रहे हैं, जब देश एक बड़े लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

पीएम मोदी ने सरकारी सेवा में शामिल होने वाले युवाओं से कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए जाने वाले फैसलों का प्रभाव देश के विकास पर पड़ सकता है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मजबूत करने और युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए काम करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि युवा होने के नाते नए सरकारी कर्मचारियों की अन्य युवाओं के प्रति विशेष जिम्मेदारी है। उनके अनुसार भारत के युवाओं के टैलेंट और स्किल्स ने दुनिया का भरोसा हासिल किया है और इनोवेटर्स, एंटरप्रेन्योर्स तथा युवा शक्ति से वैश्विक स्तर पर उम्मीदें बढ़ी हैं।

BRICS में युवाओं और उद्यमियों की भागीदारी का जिक्र

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने हाल में संपन्न BRICS Summit का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास रहा है कि BRICS सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के उद्यमी, किसान, महिलाएं और युवा भी इस साझेदारी के सक्रिय भागीदार बनें।

प्रधानमंत्री ने इसी सोच के तहत BRICS Connect और BRICS MSME Cooperation Portal जैसी पहलों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग में जब समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी बढ़ती है, तो युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से नए अवसरों की बात

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए Free Trade Agreements (FTA) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने करीब 40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार इन समझौतों से भारतीय युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय उद्यमियों के लिए नई साझेदारियों और नए बाजारों के रास्ते बनते हैं, जबकि युवाओं के लिए करियर के नए अवसर पैदा होते हैं।

शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर सरकार के प्रयास

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत सरकार का लगातार जोर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर रहा है। उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और अप्रेंटिसशिप जैसी पहलों का उल्लेख किया।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि युवाओं की शिक्षा और उनकी स्किल्स बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप विकसित हों। उन्होंने उद्योगों की भागीदारी और तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया।

भाषण में PM-SETU योजना का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध भाषण ट्रांसक्रिप्ट में इस योजना के तहत सरकारी ITI को आधुनिक बनाने के लिए निवेश का जिक्र है, हालांकि ट्रांसक्रिप्ट में निवेश की राशि “₹000 करोड़” के रूप में दर्ज है।

छोटे शहरों और युवाओं के स्टार्टअप का जिक्र

प्रधानमंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को युवाओं की क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और अब स्टार्टअप की कहानी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि करीब आधे रिकॉग्नाइज्ड स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। इसका मतलब यह है कि गांव, कस्बों और छोटे शहरों के युवा भी नई अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि छोटे शहरों के युवा अपने आइडियाज पर काम कर रहे हैं, नई कंपनियां बना रहे हैं और अपने साथ दूसरे युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रहे हैं।

2 करोड़ युवाओं को पहली बार वर्कफोर्स में शामिल करने की बात

प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का उल्लेख किया। भाषण के अनुसार इस योजना पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इससे करीब 2 करोड़ युवाओं को पहली बार वर्कफोर्स का हिस्सा बनने का अवसर मिलने की बात कही गई।

उन्होंने कहा कि पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को योजना के तहत 15 हजार रुपये तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। साथ ही नए रोजगार पैदा करने वाले नियोक्ताओं को भी सरकार प्रोत्साहित कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार अलग-अलग स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार के नए अवसर तभी तेजी से बनते हैं, जब अर्थव्यवस्था का विस्तार होता है, निवेश बढ़ता है, नए उद्योग स्थापित होते हैं और नए सेक्टर आगे बढ़ते हैं।

भारत की आर्थिक वृद्धि का भी जिक्र

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। भाषण के मुताबिक उन्होंने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत ग्रोथ रेट और निवेश में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि दुनिया में मौजूद कई अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने इसके पीछे पिछले वर्षों में किए गए रिफॉर्म्स को महत्वपूर्ण बताया और नए सरकारी कर्मचारियों से अपने कार्यकाल के दौरान सुधारों की गति को आगे बढ़ाने की अपील की।

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को आगे बढ़ाने की अपील

प्रधानमंत्री ने टैक्स और कंप्लायंस को सरल बनाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने, शिक्षा और स्किलिंग में सुधार तथा नए सेक्टरों को इनोवेशन के लिए खोलने जैसे विषयों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि देश में सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए और सरकारी कर्मचारी के रूप में नए नियुक्त युवाओं की इसमें बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने काम के दौरान यह देखना चाहिए कि उनके फैसलों से देश के युवाओं की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिले।

‘हर फाइल पर किया गया सिग्नेचर युवा आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला हो’

प्रधानमंत्री ने नए सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका हर निर्णय और हर फाइल पर किया गया सिग्नेचर युवाओं की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था में काम करते हुए नए कर्मचारियों को यह प्रयास करना चाहिए कि युवाओं के रास्ते की बाधाएं कम हों और उनके आइडियाज को आगे बढ़ने का अवसर मिले। प्रधानमंत्री ने इनोवेशन, इन्वेस्टमेंट और एंप्लॉयमेंट के बीच संबंध पर भी जोर दिया।

‘जो परेशानियां आपने देखीं, दूसरे युवाओं को न झेलनी पड़े’

प्रधानमंत्री ने सरकारी सेवा में आने वाले युवाओं से अपने अनुभवों को प्रशासनिक काम में उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन परेशानियों से नए कर्मचारी या उनके माता-पिता गुजरे हैं, वैसी परेशानियों से दूसरे युवाओं और नागरिकों को न गुजरना पड़े, इसके लिए सरकारी व्यवस्था में काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में आने के साथ ही कर्मचारियों का प्रयास होना चाहिए कि नागरिकों के सामने आने वाली समस्याओं को कम किया जाए और व्यवस्था को ज्यादा संवेदनशील बनाया जाए।

कर्मयोगी प्लेटफॉर्म और लगातार सीखने पर जोर

पीएम मोदी ने नए कर्मचारियों से लगातार सीखते रहने और अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी और नए सिस्टम को समझना जरूरी है।

उन्होंने मिशन कर्मयोगी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकारी कर्मचारियों को अपनी क्षमता विकसित करने में मदद करता है। भाषण के अनुसार, कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से 1 करोड़ 70 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़ चुके हैं और नए कर्मचारियों के लिए ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ तैयार किया गया है।

‘नागरिक देवो भव’ को बताया सरकारी सेवा का मंत्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सरकारी कर्मचारियों को नागरिकों के प्रति संवेदनशील रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार की वास्तविक ताकत देश के नागरिकों का विश्वास है।

उन्होंने समझाया कि सरकारी कर्मचारी चाहे किसी भी मंत्रालय या विभाग में काम करे, उसके काम का असर किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन पर पड़ता है। किसी बुजुर्ग की पेंशन, किसी विद्यार्थी की स्कॉलरशिप या किसी किसान को मिलने वाली सुविधा में सरकारी कर्मचारी की भूमिका हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई मामलों में सरकारी कर्मचारी ही नागरिक के लिए सरकार का चेहरा होता है। इसलिए उसके व्यवहार, संवेदनशीलता, दक्षता और ईमानदारी से यह तय होता है कि नागरिक का सरकार के साथ अनुभव कैसा रहेगा।

इसी संदर्भ में उन्होंने “नागरिक देवो भव” को सरकारी सेवा का मंत्र बताया और कहा कि नागरिक की सेवा राष्ट्र की सेवा है। उनके मुताबिक किसी कर्मचारी की सफलता तब ज्यादा महत्वपूर्ण होगी, जब उसके काम से किसी नागरिक का जीवन आसान हो।

युवाओं को नई जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं को एक बार फिर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में शामिल होने के बाद युवाओं के सामने सीखने, जिम्मेदारी निभाने और नागरिकों की सेवा करने की नई यात्रा शुरू हो रही है।

प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि नए कर्मचारी जिस भी विभाग में काम करें, वे कर्तव्य और सेवा भाव के साथ अपने दायित्वों को निभाएंगे। उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संबोधन का मुख्य फोकस 51 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा में नई जिम्मेदारी, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, युवाओं की भूमिका, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार, स्टार्टअप, आर्थिक विकास, प्रशासनिक सुधार और नागरिक सेवा पर रहा।

नए सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लगातार सीखने, तकनीक को अपनाने और नागरिकों की समस्याओं को समझकर काम करने पर जोर दिया। भाषण में यह संदेश प्रमुख रहा कि सरकारी नौकरी केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा और प्रशासनिक व्यवस्था में जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है।

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