लखनऊ। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उत्तराखंड में जनसभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि खड़गे के कार्यक्रम के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मंच का शुद्धिकरण किया गया, लेकिन इस कथित घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
इसी के विरोध में सोमवार, 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मुख्यालय, नेहरू भवन, माल एवेन्यू लखनऊ से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए। मार्च का नेतृत्व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने किया।
कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए दो प्रमुख मांगें उठाईं। पहली, राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर को तत्काल निरस्त किया जाए और दूसरी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
भारी बारिश के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

लखनऊ में आयोजित विरोध मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान और राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर कांग्रेसजनों में आक्रोश है।
कांग्रेस का कहना है कि जिस घटना को लेकर राहुल गांधी ने कार्रवाई की मांग की, उसी मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है। पार्टी ने उत्तराखंड सरकार से कथित मंच शुद्धिकरण की घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विरोध मार्च में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के अलावा सांसद तनुज पुनिया, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अजय राय बोले- ‘दलित विरोधी है केंद्र की सरकार’
विरोध मार्च को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार दलित विरोधी है।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समाज से आते हैं और देश के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। कांग्रेस अध्यक्ष के उत्तराखंड के हल्द्वानी में जनसभा करने के बाद भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा मंच का शुद्धिकरण किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
हालांकि, मंच के कथित शुद्धिकरण और इसमें शामिल लोगों को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। कांग्रेस ने इसी मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
अजय राय ने कहा कि किसी दलित नेता की जनसभा के बाद मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण किया जाना अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे कानून के तहत जांच का विषय बताते हुए आरोप लगाया कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय कार्रवाई की मांग करने वाले राहुल गांधी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी।
कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन की ओर से कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी ने सवाल उठाया कि जिस मुद्दे पर राहुल गांधी ने आवाज उठाई, उसी मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का औचित्य क्या है।
राहुल गांधी पर FIR को लेकर कांग्रेस आक्रामक
उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर अब कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने साफ किया है कि पार्टी इस कार्रवाई का विरोध जारी रखेगी।
अजय राय ने मांग की कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को तत्काल वापस लिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कथित मंच शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई किए जाने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरे मामले में कार्रवाई का तरीका एकतरफा रहा है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी घटना को लेकर शिकायत या आपत्ति दर्ज होती है तो पुलिस और प्रशासन को सभी पक्षों की जांच करने के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
संविधान और सामाजिक न्याय को बनाया मुद्दा
कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को केवल एक एफआईआर का मामला न बताते हुए इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ दिया है। पार्टी का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं में से एक हैं और उनके साथ कथित तौर पर हुए इस व्यवहार को सामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अजय राय ने अपने बयान में संविधान, समानता और सामाजिक सम्मान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित समाज के साथ भेदभाव की किसी भी घटना पर कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी सामाजिक बराबरी और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। लखनऊ में निकाला गया विरोध मार्च इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

विरोध मार्च में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें सांसद तनुज पुनिया, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना, शिव पांडेय, कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. उमाशंकर पांडेय, जिलाध्यक्ष रूद्रदमन सिंह बबलू, शहर अध्यक्ष उत्तरी अमित श्रीवास्तव त्यागी और शहर अध्यक्ष दक्षिणी डॉ. शहजाद आलम समेत कई नेता शामिल रहे।
इसके अलावा एचएल दुसाध, सुरेंद्र यादव, संजय शर्मा, राजेश जायसवाल, ममता चौधरी, शालिनी सिंह, पंकज तिवारी, अनामिका यादव, सुशीला शर्मा, नरेंद्र गौतम, नरेश वाल्मीकि, बृजेंद्र कुमार सिंह, नईम सिद्दीकी, सलमान बशर, सलीम अख्तर, पुष्पेंद्र सिंह, अब्दुल्ला शेर खान, मुकेश सिंह चौहान, संजय सिंह, प्रदीप सिंह एडवोकेट, अंशु त्रिपाठी, आशुतोष मिश्रा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मार्च में मौजूद रहे।
उत्तराखंड मामले को यूपी में मिला राजनीतिक समर्थन
उत्तराखंड से जुड़े इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने जिस तरह लखनऊ में प्रदर्शन किया है, उससे साफ है कि पार्टी इसे व्यापक राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस का फोकस राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के साथ-साथ मल्लिकार्जुन खड़गे के सम्मान और सामाजिक भेदभाव के आरोपों पर है।
पार्टी का कहना है कि दोनों मामलों में समान रूप से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने भाजपा सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि कथित घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई और राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई किस आधार पर की गई।
फिलहाल कांग्रेस की मांग है कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए और मंच के कथित शुद्धिकरण मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि कांग्रेस इसे सामाजिक सम्मान, दलित अधिकार, संविधान और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर उठा रही है।
नोट: इस खबर में मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’, एफआईआर और संबंधित घटनाओं के संबंध में दी गई जानकारी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से होनी बाकी है।
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