1959 की फिल्म ‘छोटी बहन’ का ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ आज भी राखी के मौके पर खूब सुना जाता है
नई दिल्ली। रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्यार, भरोसे और अपनापन जताने का दिन है। इस रिश्ते को हिंदी सिनेमा ने भी कई यादगार गीतों के जरिए आवाज दी है। इनमें लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड हुआ ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ आज भी सबसे ज्यादा याद किए जाने वाले राखी गीतों में शामिल है।
साल 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘छोटी बहन’ का यह गीत करीब सात दशक का सफर पूरा कर चुका है। समय बदला, संगीत की पसंद बदली और मनोरंजन के माध्यम भी बदल गए, लेकिन इस गीत की भावनात्मक पकड़ अब भी कायम है। फिल्म में यह गीत नंदा और बलराज साहनी पर फिल्माया गया था। गीत के संगीतकार शंकर-जयकिशन और गीतकार शैलेंद्र थे।
राखी के साथ क्यों जुड़ गया यह गीत?
इस गीत की सबसे खास बात यह है कि इसमें भाई-बहन के रिश्ते को किसी बड़े उपदेश के बजाय बेहद सहज भावनाओं के साथ सामने रखा गया है। बहन अपने भाई से रिश्ते को हमेशा निभाने और उसे न भूलने की उम्मीद करती है।
राखी के धागे को यहां सिर्फ एक त्योहार की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच लंबे समय तक बने रहने वाले रिश्ते की निशानी के तौर पर महसूस किया जाता है। यही वजह है कि कई पीढ़ियों के लिए यह गीत रक्षाबंधन की यादों का हिस्सा बन गया।
लता मंगेशकर की आवाज ने बदली गीत की पहचान
गीत के शब्दों में मौजूद भावनाओं को लता मंगेशकर की आवाज ने खास गहराई दी। उनकी गायकी की सादगी और भावपूर्ण अंदाज ने इसे ऐसा रूप दिया कि यह महज फिल्म का गीत न रहकर रक्षाबंधन के लोकप्रिय गीतों में शामिल हो गया।
‘छोटी बहन’ और इस गीत का उल्लेख आज भी पुराने हिंदी सिनेमा और रक्षाबंधन के सदाबहार गीतों की चर्चा में मिलता है।
गीत के पीछे थी भाई-बहन के रिश्ते की कहानी
‘छोटी बहन’ में भाई-बहन के रिश्ते को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया था। ऐसे में फिल्म के भीतर इस गीत का इस्तेमाल भी भावनात्मक संदर्भ में हुआ। पर्दे पर भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन और उसके साथ जुड़ी उम्मीदों ने गीत के असर को और मजबूत किया।
यही कारण है कि गीत सुनते ही लोगों को अपने भाई या बहन की याद आना आज भी आम बात है।
क्या रिकॉर्डिंग के दौरान लता मंगेशकर रो पड़ी थीं?
इस गीत से जुड़ी एक लोकप्रिय कहानी यह है कि इसे गाते समय लता मंगेशकर भावुक हो गई थीं और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। इसके पीछे उनके भाई-बहनों के साथ गहरे रिश्ते का जिक्र किया जाता है।
हालांकि, इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने वाला स्पष्ट प्राथमिक रिकॉर्ड सामने नहीं आता। इसलिए इसे गीत से जुड़ी प्रचलित कहानी के रूप में ही देखना बेहतर होगा, न कि पूरी तरह प्रमाणित घटना के रूप में।
सात दशक बाद भी नहीं हुआ पुराना
1959 से 2026 तक लगभग 67 साल बीत चुके हैं। इस दौरान संगीत की दुनिया में कई बदलाव आए, लेकिन रक्षाबंधन के मौके पर पुराने गीतों की सूची में यह गाना अब भी अपनी जगह बनाए हुए है।
इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण शायद यही है कि गीत जिस भावना की बात करता है, वह किसी एक दौर तक सीमित नहीं है। भाई-बहन के बीच प्यार और एक-दूसरे को हमेशा याद रखने की इच्छा हर पीढ़ी के लिए समान रूप से मायने रखती है।
शंकर-जयकिशन और शैलेंद्र की जोड़ी का यादगार काम
इस गीत को शंकर-जयकिशन ने संगीत दिया था और इसके बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। लता मंगेशकर की आवाज के साथ इन तीनों की रचनात्मकता ने गीत को अलग पहचान दी।
आज रक्षाबंधन पर सोशल मीडिया से लेकर घरों और रेडियो तक पुराने गीतों की चर्चा होती है, तो ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ का नाम अपने आप सामने आ जाता है।
यही इस गीत की सबसे बड़ी खासियत है—करीब सात दशक बीतने के बाद भी यह सिर्फ एक पुराना फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी भावनाओं की आवाज बना हुआ है।
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