देश में बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा पर दबाव और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से विदेशी यात्राएं कम करने और खर्चों में कटौती करने की अपील पर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देशहित में लोगों को विदेशी यात्राओं, गोल्ड खरीदने और अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। उन्होंने Work From Home, Online Meetings और Virtual Conferences को फिर से प्राथमिकता देने की बात भी कही।
PM मोदी ने कहा कि आज वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण पेट्रोल-डीजल बेहद महंगा हो चुका है और भारत को विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने लोगों से पेट्रोल की खपत कम करने, विदेशों में घूमने और शादियों में विदेशी डेस्टिनेशन कल्चर को सीमित करने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने सोने की खरीद पर भी चिंता जताते हुए कहा कि संकट के समय देशहित में लोगों को कुछ समय तक Gold Jewellery खरीदने से बचना चाहिए। खाने के तेल की खपत 10% कम करने और Chemical Fertilizer का उपयोग घटाने की अपील भी प्रधानमंत्री ने की।
हालांकि इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहे हैं, तो कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या त्याग और बचत की जिम्मेदारी सिर्फ middle class पर ही डाली जा रही है?
सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि जब आम आदमी EMI, petrol, school fees, GST और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है, तब नेताओं की बड़ी रैलियां, VIP culture, हेलीकॉप्टर कैंपेन और करोड़ों के सरकारी विज्ञापन क्यों जारी हैं?
कई लोगों का कहना है कि अगर देश आर्थिक दबाव में है तो sacrifice सभी वर्गों द्वारा बराबरी से किया जाना चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स प्रधानमंत्री की अपील को देशहित और आत्मनिर्भरता की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल बचत की अपील नहीं बल्कि आने वाले आर्थिक दबावों की ओर भी संकेत माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार, आयात लागत और वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच सरकार जनता से सहयोग मांगती नजर आ रही है।
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि जनता इस अपील को देशहित में जिम्मेदारी मानती है या middle class पर बढ़ता नया बोझ।











