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लखनऊ। दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन से घायल हुए छात्र के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को दिल्ली से लेकर लखनऊ तक विरोध प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे और मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पुलिस स्तर पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया।

दिल्ली में राहुल गांधी के धरने की जानकारी लखनऊ पहुंचते ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आए। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रेस नेताओं ने धरना देकर दिल्ली की घटना पर विरोध दर्ज कराया।

राहुल गांधी छात्र को लेकर पहुंचे थाने

कांग्रेस के अनुसार, छात्र ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से चोट लगने की शिकायत की थी और इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की जा रही थी। शुक्रवार को राहुल गांधी छात्र को साथ लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे।

कांग्रेस का आरोप था कि शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा था। इसके बाद राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनके साथ प्रियंका गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बाद में छात्र की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली। इसके बाद राहुल गांधी ने छह घंटे से अधिक चले धरने को समाप्त किया।

लखनऊ में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर जुटे कार्यकर्ता

दिल्ली में राहुल गांधी के धरने की सूचना के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठे।

प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम और पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने छात्र के मामले में कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई।

FIR की सूचना मिलते ही खत्म हुआ धरना

लखनऊ में कांग्रेस का धरना चल ही रहा था कि दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने की सूचना पार्टी नेताओं तक पहुंची। इसके बाद लखनऊ में चल रहे प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन और पूर्व मंत्री डॉ. सीपी राय ने एफआईआर दर्ज होने को कांग्रेस के आंदोलन की सफलता बताया। पार्टी की ओर से कहा गया कि छात्र के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू होना उनके दबाव का परिणाम है।

हालांकि, एफआईआर दर्ज होना मामले में जांच की शुरुआत है। अब जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटना के दौरान इस्तेमाल हुए बल और छात्र को लगी चोटों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेंगी। दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर की रिपोर्टिंग में BNS की धारा 118 और 25 का उल्लेख किया गया है।

कांग्रेस ने उठाया पुलिस कार्रवाई का मुद्दा

कांग्रेस इस पूरे मामले को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जोड़कर देख रही है। पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया और घायल छात्र की शिकायत पर समय से एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

दूसरी ओर, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक स्तर पर सामने आए तथ्यों की जांच अब पुलिस केस के माध्यम से होगी। रिपोर्टों में संसद मार्ग थाने की डेली डायरी में एंटी-रायट गन और प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है।

लखनऊ के धरने में कई नेता रहे मौजूद

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के धरने में एआईसीसी सचिव जगदीश चंद्र जांगीड़, विधायक वीरेंद्र चौधरी, विश्वविजय सिंह, मनोज यादव, डॉ. उमाशंकर पांडेय, प्रियंका गुप्ता, डॉ. राज कुमार मौर्य, सचिन रावत, राम गणेश प्रजापति, हर्षवर्धन श्याम, दिनेश सिंह, आसिफ रिजवी रिंकू, ब्रज मौर्य, बृजेन्द्र कुमार सिंह, तरुण पटेल, राकेश पासवान, जितेंद्र पटेल, शरद शुक्ला, संजय मौर्य, अभिषेक तिवारी, राहुल सचान, नीतम सचान, आशीष सिंह, सुशीला शर्मा, शीला मिश्रा, अभिषेक पटेल, शहबाज खान और अखिलेश वर्मा समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अब आगे क्या?

एफआईआर दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस के सामने अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जिम्मेदारी है। छात्र को लगी चोट, घटना के दौरान पुलिस बल की कार्रवाई और कथित पैलेट फायरिंग से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है।

नोट: पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों को इस खबर में आरोप/दावे के रूप में रखा गया है। एफआईआर दर्ज होना आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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