लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रदेश कार्यालय में कथित तौर पर घुसकर पिस्टल दिखाने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने घटना को गंभीर बताते हुए पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी की ओर से 13 अगस्त 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में घटना को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है।
कार्यालय में पहुंचकर खुद को सपा कार्यकर्ता बताने का आरोप
सुभासपा के मुताबिक, एक व्यक्ति कथित तौर पर प्रदेश कार्यालय पहुंचा और खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उक्त व्यक्ति ने कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश चौधरी से कहा कि “अखिलेश भैया के खिलाफ कुछ बोला तो ठीक नहीं होगा।” इसके बाद उस व्यक्ति पर कथित रूप से गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। विरोध करने पर कार्यालय प्रभारी के साथ मारपीट किए जाने तथा पिस्टल निकालकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
पार्टी का कहना है कि घटना के समय डॉ. अरविंद राजभर स्वयं कार्यालय में मौजूद नहीं थे। हालांकि, आरोप है कि संबंधित व्यक्ति जाते समय उनका नाम लेकर भी कथित तौर पर हत्या की धमकी दे गया। इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें मारपीट, पिस्टल निकालने और डॉ. अरविंद राजभर तथा कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश चौधरी को जान से मारने की धमकी देने के आरोप दर्ज कराए गए हैं।
अखिलेश यादव से डॉ. अरविंद राजभर का सीधा सवाल
घटना को लेकर डॉ. अरविंद राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी सवाल किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताकर उनके नाम का सहारा लेते हुए किसी दूसरे राजनीतिक दल के कार्यालय में धमकी देता है, तो क्या अब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के खिलाफ राजनीतिक बयान देने के लिए भी समाजवादी पार्टी से अनुमति लेनी होगी?
डॉ. राजभर ने कहा कि यदि घटना अखिलेश यादव की जानकारी में नहीं है तो उन्हें सामने आकर स्पष्ट शब्दों में इसकी निंदा करनी चाहिए और यह कहना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति तथा उसकी हरकतों से समाजवादी पार्टी का कोई संबंध नहीं है।
“राजनीतिक लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए”
सुभासपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को एक-दूसरे की नीतियों का विरोध करने और अपनी बात जनता के सामने रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समाजवादी पार्टी की नीतियों का विरोध करना होगा तो उनकी पार्टी करेगी और यदि अखिलेश यादव के खिलाफ राजनीतिक सवाल उठाने होंगे तो वे भी उठाए जाएंगे।
डॉ. अरविंद राजभर ने कहा कि किसी भी तरह की धमकी या पिस्टल के बल पर उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उनके मुताबिक राजनीतिक संघर्ष जनता के बीच और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। सवाल का जवाब सवाल से, आरोप का जवाब तर्क से और नीतियों का जवाब नीतियों से दिया जाना चाहिए।
“पिस्टल दिखाना लोकतंत्र नहीं, कानून-व्यवस्था का गंभीर मामला”
डॉ. राजभर ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में घुसकर पिस्टल दिखाना और धमकी देना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से दिए गए कुछ बयानों को उनकी पार्टी ने गंभीरता से लिया था और उन्हें अप्रत्यक्ष धमकी के रूप में महसूस किया गया था। ऐसे में अब कथित तौर पर सपा कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा अखिलेश यादव का नाम लेकर धमकी दिए जाने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आरोपी को इस तरह की हरकत करने का साहस कहां से मिला।
पुलिस जांच से सामने आएगा आरोपी अकेला था या पीछे कोई और
सुभासपा के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आरोपी अकेले आया था या उसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की भूमिका थी।
उन्होंने कहा कि जिसने अपराध किया है, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि मामले में पुलिस की निष्पक्ष जांच से ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां और आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।
“धमकी या पिस्टल दिखाकर नहीं दबाई जा सकती आवाज”
डॉ. अरविंद राजभर ने अपने बयान के अंत में कहा कि उन्हें न तो धमकी से डराया जा सकता है और न ही पिस्टल दिखाकर चुप कराया जा सकता है। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों को लोकतांत्रिक तरीके से मैदान में आने की चुनौती देते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनता के बीच अपनी बात रखती रही है और आगे भी मजबूती से रखती रहेगी।
उन्होंने कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी।
नोट: यह खबर सुभासपा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों और पार्टी के बयानों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है। मामले में पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही घटना के तथ्यों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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