लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में कार्यरत आउटसोर्स परिचालकों ने अपनी सेवा शर्तों और कार्य परिस्थितियों को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी को अब सार्वजनिक रूप से सामने लाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में आउटसोर्स परिचालकों ने निगम प्रबंधन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, समय पर मानदेय और सामाजिक सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जा सकता है।
परिचालकों का कहना है कि वे वर्षों से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में नियमित कर्मचारियों की तरह जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा, टिकट व्यवस्था, राजस्व संग्रह और दैनिक संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उनके कंधों पर होती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
नियमितीकरण बना सबसे बड़ा मुद्दा
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त कर योग्य कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति देने की है। परिचालकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें ठेका व्यवस्था के तहत रखा गया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर असुरक्षा बनी रहती है। उनका कहना है कि यदि निगम लगातार उनकी सेवाएं ले रहा है तो उन्हें भी स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि ठेका प्रणाली के कारण रोजगार की स्थिरता प्रभावित होती है और कर्मचारियों को भविष्य की कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं मिलती।
‘समान कार्य, समान वेतन’ की उठी मांग
आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा “समान कार्य के लिए समान वेतन” रहा। परिचालकों का कहना है कि वे वही कार्य करते हैं जो नियमित परिचालक करते हैं, लेकिन दोनों के वेतन और सुविधाओं में बड़ा अंतर है। उनका तर्क है कि समान जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए समान कार्य-समान वेतन संबंधी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए निगम से इस व्यवस्था को लागू करने की मांग की।
समय पर मानदेय नहीं मिलने से बढ़ रही आर्थिक परेशानी
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कई बार आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं मिलता। कर्मचारियों का कहना है कि अनियमित भुगतान के कारण उन्हें परिवार चलाने, बच्चों की शिक्षा और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक माह निर्धारित समय सीमा के भीतर सीधे बैंक खाते में मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि कर्मचारियों को आर्थिक अस्थिरता का सामना न करना पड़े।
EPF, ESI और सामाजिक सुरक्षा पर भी सवाल
परिचालकों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईपीएफ, ईएसआई और अन्य वैधानिक सुविधाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कर्मचारियों का कहना है कि यदि ये योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ लागू होंगी तो भविष्य में उन्हें और उनके परिवारों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
गृह जनपद में तैनाती की मांग
ज्ञापन में कर्मचारियों ने गृह जनपद अथवा निकटवर्ती डिपो में तैनाती की भी मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई कर्मचारियों को अपने घर से काफी दूर कार्य करना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होता है।
कर्मचारियों का मानना है कि यदि गृह जनपद या नजदीकी डिपो में तैनाती की व्यवस्था की जाए तो कार्य क्षमता भी बढ़ेगी और कर्मचारियों की समस्याएं भी कम होंगी।
महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए समान अवसर
ज्ञापन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि नियुक्ति और कार्य आवंटन में समानता सुनिश्चित की जाए। परिचालकों ने मांग की कि महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाए तथा सेवा संबंधी निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएं।
ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता की मांग
आउटसोर्स कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। उन्होंने मांग की कि ड्यूटी निर्धारण के लिए स्पष्ट और समान नियम बनाए जाएं ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ पक्षपात की स्थिति न बने।
प्रबंधन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने फिलहाल लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें निगम प्रबंधन के समक्ष रखी हैं। उनका उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रबंधन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) प्रबंधन की ओर से ज्ञापन या कर्मचारियों की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो वे आगामी दिनों में अपने आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।












