लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन CYVAJRA” के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त कार्रवाई में 7 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।
यह कार्रवाई 17 जुलाई 2026 को सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र स्थित ओमेक्स R-02 रेजिडेंशियल अपार्टमेंट में संचालित एक अवैध अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर पर की गई। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लैपटॉप, मोबाइल, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी सामग्री बरामद की है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान “CYVAJRA” के तहत यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त लखनऊ के निर्देशन में की गई।
पूरे अभियान की निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय), पुलिस उपायुक्त अपराध, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध तथा सहायक पुलिस आयुक्त साइबर सेल के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई को साइबर क्राइम थाना एवं साइबर सेल की टीम ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।
कैसे काम करता था अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से आधुनिक इंटरनेट आधारित संचार प्रणाली VoIP Calling, हाई स्पीड इंटरनेट, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से विदेशी नागरिकों को फोन करता था।
गिरोह पहले अमेरिका के नागरिकों का डेटा जुटाता था और फिर उन्हें विभिन्न प्रकार के साइबर खतरे का डर दिखाकर मानसिक रूप से दबाव में लेता था।
ठगी का तरीका (Modus Operandi)
गिरोह पीड़ितों को कॉल कर खुद को—
- Microsoft Support का अधिकारी
- Cyber Security Expert
- Federal Trade Commission (FTC) का अधिकारी
- अन्य अमेरिकी सरकारी एजेंसियों का प्रतिनिधि
बताता था।
इसके बाद पीड़ितों को बताया जाता था कि—
- उनके बैंक खाते हैक हो चुके हैं।
- उनकी डिजिटल पहचान (Identity) चोरी हो गई है।
- उनके Social Security Number का गलत इस्तेमाल हुआ है।
- यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी हो सकती है।
विश्वास दिलाने के लिए गिरोह नकली सरकारी दस्तावेज तैयार कर ई-मेल करता था, जिनमें शामिल थे—
- Identity Theft Report
- FTC Letter
- Investigation Report
- Non-Disclosure Agreement (NDA)
इन दस्तावेजों का स्वरूप बिल्कुल सरकारी रिकॉर्ड जैसा बनाया जाता था ताकि पीड़ित आसानी से झांसे में आ जाए।
कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली
पुलिस जांच के अनुसार कॉल सेंटर पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से संचालित किया जा रहा था।
हर कर्मचारी की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी।
Dialer Team
- विदेशी नागरिकों से पहला संपर्क करती थी।
- तकनीकी सहायता का झांसा देती थी।
- पीड़ित का विश्वास जीतती थी।
इसके बाद—
- पीड़ित के लैपटॉप या कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस लिया जाता था।
- बैंकिंग और वित्तीय जानकारी प्राप्त की जाती थी।
- पीड़ितों से डॉलर में भुगतान कराया जाता था।
- धनराशि को विभिन्न माध्यमों से अन्य खातों में ट्रांसफर कराया जाता था।
भर्ती भी थी बेहद सुनियोजित
पुलिस के अनुसार गिरोह विभिन्न राज्यों से युवाओं की भर्ती करता था।
भर्ती में प्राथमिकता उन लोगों को दी जाती थी जिन्हें—
- अच्छी अंग्रेजी बोलनी आती हो।
- BPO या कॉल सेंटर का अनुभव हो।
- अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करने का अनुभव हो।
स्टाफ को रहने की व्यवस्था भी गिरोह द्वारा कराई जाती थी, लेकिन किसी प्रकार का नियुक्ति पत्र या आधिकारिक अनुबंध नहीं दिया जाता था।
पुलिस ने बरामद किए महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में—
- लैपटॉप
- मोबाइल फोन
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
- डिजिटल स्टोरेज
- इंटरनेट आधारित संचार प्रणाली
- अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य
बरामद किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध साइबर क्राइम थाना, लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफआईआर में शामिल प्रमुख धाराएं—
- बीएनएसएस अपराध संख्या 81/2026
- धारा 3(5)
- 61(2)
- 318(4)
- 319(2)
- 336(3)
- 337
- 338
- 340(2)
- बीएनएस की संबंधित धाराएं
- आईटी एक्ट की प्रासंगिक धाराएं
गिरफ्तार किए गए कुल 7 आरोपी
पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रेस नोट के अनुसार आरोपी विभिन्न राज्यों से जुड़े हुए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात के निवासी शामिल हैं। सभी आरोपी ओमेक्स R-02 रेजिडेंशियल अपार्टमेंट से संचालित अवैध कॉल सेंटर में काम कर रहे थे।
20 सदस्यीय पुलिस टीम ने दिया ऑपरेशन को अंजाम
इस पूरे ऑपरेशन में साइबर क्राइम थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम शामिल रही।
टीम का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक आलोक राय तथा प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह ने किया। उनके साथ निरीक्षक, उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी एवं आरक्षियों की लगभग 20 सदस्यीय टीम ने छापेमारी कर इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
पुलिस का बयान
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने कहा कि साइबर अपराध के विरुद्ध Zero Tolerance Policy के तहत कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
आगे भी—
- तकनीकी दक्षता
- प्रभावी खुफिया सूचना
- डिजिटल जांच
- विधिक प्रावधानों
का उपयोग करते हुए ऐसे संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि नागरिकों का डिजिटल वातावरण सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रमुख बिंदु
- ऑपरेशन CYVAJRA के तहत बड़ी कार्रवाई।
- अमेरिका के नागरिकों से साइबर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया।
- लखनऊ के ओमेक्स R-02 अपार्टमेंट में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर।
- 7 साइबर अपराधी गिरफ्तार।
- VoIP Calling और नकली सरकारी दस्तावेजों से की जाती थी ठगी।
- Microsoft Support और FTC अधिकारी बनकर लोगों को फंसाते थे।
- लैपटॉप, मोबाइल और डिजिटल साक्ष्य बरामद।
- 20 सदस्यीय पुलिस टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
- पुलिस ने भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रखने का भरोसा दिया।
(नोट: यह समाचार पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा जारी प्रेस नोट के आधार पर तैयार किया गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आने पर पुलिस द्वारा अतिरिक्त जानकारी जारी की जा सकती है।)













