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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में तीन छात्रों के निष्कासन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। फीस वृद्धि, विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और छात्र हितों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में शनिवार को रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।

धरना स्थल पर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने “अनिश्चितकालीन धरना” के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने छात्रों के समर्थन में हस्ताक्षर किए।

“गुरु का काम भविष्य बनाना है, बिगाड़ना नहीं”

मीडिया से बातचीत में संदीप पांडे ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों का भविष्य बनाना होता है, न कि उनकी आवाज दबाकर उन्हें निष्कासित करना।

उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य नरेंद्र देव का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यहां तक कि निष्कासित छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों से बात कर उन्हें प्रवेश दिलाया था।

उन्होंने कहा,

“अगर कोई छात्र गलती भी करता है तो उसे समझाना शिक्षक और कुलपति की जिम्मेदारी है। छात्रों का भविष्य खत्म करना शिक्षा व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”

फीस वृद्धि और छात्र आंदोलन को बताया जायज

संदीप पांडे ने कहा कि छात्र विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे थे। ऐसे मुद्दों पर संवाद होना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने निष्कासन जैसी कठोर कार्रवाई कर दी, जिससे छात्रों में असंतोष और बढ़ा है।

सोनम वांगचुक के समर्थन में भी बोले

बातचीत के दौरान संदीप पांडे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर के लोग उनके समर्थन में खड़े हैं और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

राम मंदिर ट्रस्ट और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

साक्षात्कार के दौरान संदीप पांडे ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मामले में भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है तो हर मामले में समान कार्रवाई होनी चाहिए।

बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

संदीप पांडे ने उत्तर प्रदेश सरकार के रोजगार और शिक्षा संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदेश में आज भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और विदेशों तक जाने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने पर गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।

जौहर यूनिवर्सिटी पर भी रखी राय

जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक कमियां थीं तो सरकार के पास अधिग्रहण सहित कई वैधानिक विकल्प मौजूद थे। शिक्षा संस्थानों को बंद करने के बजाय उन्हें छात्रों के हित में संचालित करने पर विचार किया जाना चाहिए।

छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान

धरने पर बैठे छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक निष्कासित छात्रों की बहाली, फीस वृद्धि वापस लेने और विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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