लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता हरीश ने एक विशेष बातचीत में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और केंद्र सरकार पर किसानों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि सरकार किसानों की आय दोगुनी होने का दावा कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि किसानों की लागत लगातार बढ़ी है और उनकी आमदनी घटती जा रही है।
उन्होंने कहा कि “लोकदल ही किसान है और किसान ही लोकदल है।” सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। किसान आज भी यूरिया, बीज और फसल के उचित मूल्य के लिए संघर्ष कर रहा है।
यूरिया और बीज के संकट का आरोप
हरीश ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान यूरिया के लिए घंटों नहीं बल्कि कई-कई दिनों तक लाइन में लगने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
उनका कहना था कि सरकार मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान परेशान है और उसकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
“किसान की आय आधी, लागत डबल”
लोकदल प्रवक्ता ने केंद्र सरकार के किसानों की आय दोगुनी होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है।
उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। ऐसे में किसान की आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा कमजोर हुई है और उस पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
MSP को लेकर सरकार पर निशाना
हरीश ने कहा कि किसानों को आज भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ पूरी तरह नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि MSP सरकार तय करती है, किसान नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि खेतों की वास्तविक लागत को समझे बिना एयर कंडीशंड कमरों में बैठकर फसलों के दाम तय किए जाते हैं, जबकि किसान अपनी मेहनत और लागत के अनुरूप मूल्य पाने से वंचित रह जाता है।
गन्ना किसानों के भुगतान पर उठाए सवाल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए लोकदल प्रवक्ता ने कहा कि कई चीनी मिलों पर किसानों का भुगतान लंबे समय से बकाया है।
उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर किसानों को एक-एक वर्ष तक गन्ने का भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग की।
किसान आंदोलन और सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी
हरीश ने कहा कि जब किसान अपने अधिकारों की मांग करता है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आवाज उठाने वालों को अलग-अलग नाम देकर बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसान अपनी ताकत का इस्तेमाल मतदान के जरिए करेगा और अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेगा।
राम मंदिर चंदा और जांच पर भी बोले
बातचीत के दौरान हरीश ने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा और चोरी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार के दावों और विपक्ष के आरोपों के बीच सियासत तेज
एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने, समय पर भुगतान और कृषि योजनाओं को सफल बताने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष लगातार किसानों की बदहाल स्थिति, MSP, खाद की उपलब्धता और गन्ना भुगतान जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में किसानों के मुद्दे एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं।













