लखनऊ | नई सोच नई ऊर्जा
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा सील किए गए कैसरबाग स्थित निशात सिनेमा हॉल परिसर में कथित रूप से रातों-रात निर्माण कार्य होने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। अवैध निर्माण के आरोपों के बीच अब LDA और पुलिस आमने-सामने हैं। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन सील था, तो अंदर निर्माण कार्य आखिर किसके संरक्षण में होता रहा?
LDA और पुलिस के दावों में विरोधाभास
मामले में LDA का कहना है कि भवन को सील किए जाने के बाद उसकी अभिरक्षा पुलिस के जिम्मे थी। वहीं पुलिस का स्पष्ट कहना है कि उन्हें इस संबंध में न तो कोई लिखित आदेश मिला और न ही भवन की सुरक्षा या निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
दोनों विभागों के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को और अधिक उलझा दिया है।
रात में चलता रहा निर्माण, उठे कई सवाल
सूत्रों के अनुसार, सील भवन के भीतर देर रात तक निर्माण कार्य चलता रहा। यदि यह दावा सही है, तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—
- सील भवन के अंदर निर्माण सामग्री कैसे पहुंची?
- मजदूरों की आवाजाही किसकी निगरानी में हुई?
- यदि भवन सील था, तो उसकी नियमित निगरानी कौन कर रहा था?
- क्या सील से छेड़छाड़ हुई या निर्माण किसी की मिलीभगत से कराया गया?
इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी भी विभाग के पास स्पष्ट रूप से नहीं है।
LDA अधिकारी ने फोन काटा
मामले में LDA ज़ोन-6 के अवर अभियंता सुनील कुमार ने प्रारंभिक बातचीत में दावा किया कि निर्माण कार्य रुका हुआ है। लेकिन जब उनसे रात में निर्माण कार्य चलने के आरोपों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने आवाज स्पष्ट न आने की बात कहते हुए फोन काट दिया। इसके बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी
घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों में भी नाराज़गी है। उनका कहना है कि यदि सरकारी एजेंसियों द्वारा सील किए गए भवन में भी अवैध निर्माण जारी रह सकता है, तो कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सील तोड़ने वालों के साथ-साथ निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी तस्वीर
फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में निर्माण कार्य कब और किन परिस्थितियों में हुआ। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि सील भवन में निर्माण कराया गया, तो संबंधित विभागों की जवाबदेही और कार्रवाई का विषय और गंभीर हो जाएगा।













