लखनऊ। राजधानी लखनऊ के शहीद स्मारक पर शुक्रवार को सवर्ण मोर्चा की ओर से आरक्षण व्यवस्था के विरोध में शांतिपूर्ण धरना एवं जनचर्चा कार्यक्रम की शुरुआत की गई। आंदोलन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष संदीप सिंह ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक और विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि शामिल हुए। मंच से वक्ताओं ने समान शिक्षा, समान अधिकार और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाते हुए सरकार से इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय बहस कराने की अपील की।
धरना स्थल पर लगे बैनरों और पोस्टरों के माध्यम से संगठन ने “समान कार्य, समान अधिकार” और “समान शिक्षा” जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम के दौरान संदीप सिंह ने कहा कि देश में समानता की बात की जाती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की है तथा आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में संदीप सिंह ने कहा कि आरक्षण नीति पर खुले और व्यापक स्तर पर चर्चा की आवश्यकता है। उनका दावा था कि वर्तमान व्यवस्था समाज में नई चुनौतियां पैदा कर रही है और इस पर सभी पक्षों के साथ संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सवर्ण मोर्चा का आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और समाज के सामने रखने का प्रयास है।
कार्यक्रम के दौरान संदीप सिंह ने सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें आरक्षण समाप्त होने पर देश में अशांति की आशंका जताई गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उनका संगठन शांतिपूर्ण आंदोलन में विश्वास रखता है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए।
अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की नीतियों की भी आलोचना की। संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि चुनावों में सवर्ण समाज का समर्थन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं और मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार से सभी वर्गों के लिए समान अवसर और समान अधिकार सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और आगामी दिनों में विभिन्न जिलों में भी जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को अपनी मांगों से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। पूरे आयोजन के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में राहगीर भी मौके पर रुकते रहे।
गौरतलब है कि आरक्षण का विषय लंबे समय से देश में सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। विभिन्न संगठन समय-समय पर इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रखते रहे हैं। लखनऊ में आयोजित यह आंदोलन भी इसी बहस का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सवर्ण मोर्चा की मांगों और बयानों पर सरकार तथा अन्य राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।











