लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई विषयों की उत्तर कुंजी सार्वजनिक नहीं किए जाने का मामला अब छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, स्नातक प्रवेश से जुड़े 16 विषयों में से केवल 12 विषयों की उत्तर कुंजी ही उपलब्ध कराई गई है, जबकि पीजी एडमिशन में महज 7 विषयों की उत्तर कुंजी जारी होने की बात सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो सभी विषयों की उत्तर कुंजी सार्वजनिक करने में आखिर देरी क्यों हो रही है? छात्रों का कहना है कि उत्तर कुंजी जारी होने से उन्हें अपने प्रदर्शन का आकलन करने और किसी उत्तर पर आपत्ति होने की स्थिति में उसे चुनौती देने का अवसर मिलता है। ऐसे में उत्तर कुंजी का अभाव पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
16 में सिर्फ 12 विषयों की उत्तर कुंजी
रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ विश्वविद्यालय के स्नातक प्रवेश से जुड़े 16 विषयों में केवल 12 विषयों की उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई है। यानी कई विषयों के अभ्यर्थी अभी भी आधिकारिक उत्तर कुंजी का इंतजार कर रहे हैं।
उत्तर कुंजी किसी भी प्रवेश परीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसके माध्यम से अभ्यर्थी अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं और यदि किसी प्रश्न या उत्तर में गलती नजर आती है तो नियमानुसार आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
ऐसे में जिन विषयों की उत्तर कुंजी उपलब्ध नहीं है, उनके छात्रों के सामने यह सवाल बना हुआ है कि वे अपने परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच कैसे करें।
पीजी एडमिशन में भी स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट में पीजी प्रवेश को लेकर भी इसी तरह की स्थिति का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि पीजी एडमिशन में केवल 7 विषयों की उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई है।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्च शिक्षा में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक अंक मायने रखता है। सीटों की संख्या सीमित होने के कारण मामूली अंकों का अंतर भी अभ्यर्थी की मेरिट और प्रवेश की संभावना को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में छात्रों की मांग स्वाभाविक है कि सभी विषयों की उत्तर कुंजी समय पर जारी की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पर किसी तरह का संदेह न रहे।
एडमिशन खत्म होने के बाद उठ रहा सवाल
सबसे अहम बात यह है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उत्तर कुंजियों को लेकर सवाल बने हुए हैं। यदि उत्तर कुंजी समय पर जारी होती तो छात्र अपनी आपत्तियां निर्धारित समय के भीतर दर्ज करा सकते थे और विश्वविद्यालय को भी अंतिम परिणाम तैयार करने से पहले उन आपत्तियों का निस्तारण करने का अवसर मिलता।
लेकिन यदि प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और उत्तर कुंजी बाद में जारी होती है तो छात्रों के लिए आपत्ति दर्ज कराने और उसके आधार पर सुधार की गुंजाइश कितनी रह जाएगी, यह भी बड़ा सवाल है।
छात्रों में असमंजस, आंदोलन की आशंका
उत्तर कुंजी उपलब्ध नहीं होने से छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनने की बात सामने आ रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि छात्र भटक रहे हैं और भविष्य में धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह स्थिति किसी चेतावनी से कम नहीं है। यदि समय रहते छात्रों की शंकाओं का समाधान नहीं किया गया तो मामला प्रशासनिक कार्यालयों से निकलकर आंदोलन तक पहुंच सकता है।
पारदर्शिता केवल परिणाम जारी करने तक सीमित नहीं
विश्वविद्यालय की किसी भी प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता केवल परिणाम घोषित करने से तय नहीं होती। पूरी प्रक्रिया में प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था, आपत्तियों का निस्तारण और अंतिम मेरिट सूची तक पारदर्शिता जरूरी है।
छात्रों को यह जानने का अधिकार है कि उन्हें कितने प्रश्नों के सही उत्तर के लिए अंक मिले और किसी विवादित प्रश्न पर विश्वविद्यालय ने क्या निर्णय लिया। यही प्रक्रिया विद्यार्थियों के बीच संस्थान की विश्वसनीयता को मजबूत करती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को देनी चाहिए स्पष्ट जानकारी
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए सबसे जरूरी कदम यह होगा कि वह सभी विषयों की उत्तर कुंजी की स्थिति स्पष्ट करे। किन विषयों की कुंजी जारी हो चुकी है, किनकी लंबित है और लंबित कुंजियां कब तक जारी होंगी—इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आनी चाहिए।
इसके साथ ही छात्रों को यह भी बताया जाना चाहिए कि उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि क्या होगी और प्रवेश प्रक्रिया में यदि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर बदलाव होता है तो उसका प्रभाव मेरिट पर किस तरह पड़ेगा।
सवाल सिर्फ कुंजी का नहीं, भरोसे का है
लखनऊ विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश प्रक्रिया लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। इसलिए यहां पारदर्शिता का मानक भी उतना ही ऊंचा होना चाहिए।
उत्तर कुंजी जारी करना महज एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भरोसे से जुड़ा विषय है। यदि सभी विषयों की कुंजी उपलब्ध नहीं है तो विश्वविद्यालय को देरी का कारण स्पष्ट करना चाहिए और छात्रों की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए।
फिलहाल, एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी दर्जनों विषयों की उत्तर कुंजी को लेकर उठ रहे सवालों ने लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रवेश व्यवस्था में पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में कब तक आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करता है और छात्रों की शिकायतों का किस तरह समाधान करता है।
संपादकीय टिप्पणी: किसी भी संस्थान पर लगे आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। छात्रों की आपत्तियों और विश्वविद्यालय के जवाब—दोनों को सार्वजनिक रूप से सामने रखकर ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
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