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लखनऊ, 5 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय स्थित नेहरू भवन में शनिवार को जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिंद ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को दोषपूर्ण बताते हुए प्रश्नावली में व्यापक बदलाव की मांग की।

प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब देश में प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या सामने आए। इसके लिए उन्होंने जातियों की प्रमाणित सूची यानी ड्रॉपडाउन सूची के आधार पर जनगणना कराने की मांग की।

कांग्रेस ने कहा- सही गिनती से ही सामाजिक न्याय संभव

डॉ. अनिल जयहिंद ने कहा कि “सही गिनती → सही आंकड़े → सही हिस्सेदारी → सामाजिक न्याय” के सिद्धांत के आधार पर जातिगत जनगणना होनी चाहिए। उनके मुताबिक मौजूदा प्रारूप में ऐसी कई खामियां हैं, जिनकी वजह से देश में जातियों की वास्तविक संख्या का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा।

कांग्रेस ने मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति का अध्ययन करते हुए देशभर में प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस के मुताबिक नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम जनता से भी व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

ओपन-एंडेड विकल्प पर कांग्रेस की आपत्ति

डॉ. जयहिंद ने प्रश्नावली के सवाल नंबर 10 को लेकर विशेष आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड विकल्प रखा गया है, जबकि इसके स्थान पर प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन सूची होनी चाहिए।

कांग्रेस का तर्क है कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों, स्थानीय बोलियों और वर्तनी के साथ पहचानी जाती है। ऐसे में यदि गणनाकर्मी लोगों द्वारा बताए गए जाति के नाम को उसी रूप में दर्ज करते हैं, तो एक ही जाति के कई अलग-अलग नाम आंकड़ों में दर्ज हो सकते हैं।

पार्टी का दावा है कि इससे जातियों के आंकड़ों में बड़ी विसंगति पैदा होने की आशंका है और भविष्य में प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करना कठिन हो सकता है।

OBC की सही संख्या सामने नहीं आने का दावा

कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के प्रारूप में पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने का भी मुद्दा उठाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित विकल्पों में उपजातियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन OBC वर्ग के लिए इसी तरह की प्रमाणित सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है।

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि यदि जातिगत जनगणना में OBC की जातियों और उपजातियों की स्पष्ट सूची नहीं होगी तो बड़ी आबादी के वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे।

उन्होंने कहा कि “अगर केंद्र सरकार जातीय जनगणना में मौजूद इन खामियों को दूर नहीं करती है तो आने वाले समय में देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।”

“एक जाति के कई नाम दर्ज होने से आंकड़े बिगड़ सकते हैं”

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही जाति के अलग-अलग नाम प्रचलित हैं। यदि जनगणना के दौरान इन नामों को अलग-अलग दर्ज किया गया तो एक ही सामाजिक समूह कई हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई दे सकता है।

पार्टी के अनुसार इससे OBC और EBC समुदायों की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी का सही आकलन प्रभावित हो सकता है।

कांग्रेस ने कहा कि जनसंख्या के विश्वसनीय आंकड़ों के अभाव में शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित हिस्सेदारी तय करना भी मुश्किल होगा।

“समाज का एक्स-रे है जातिगत जनगणना”

प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जातिगत जनगणना को सामाजिक संरचना समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। नेताओं ने कहा कि देश में लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक असमानता मौजूद है और सही आंकड़ों के माध्यम से ही यह पता लगाया जा सकता है कि किस समुदाय की वास्तविक स्थिति क्या है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जातिगत जनगणना समाज का “एक्स-रे” करने जैसा है। उनका तर्क था कि जब बीमारी की वास्तविक स्थिति सामने आती है तभी उसके समाधान के लिए प्रभावी नीति बनाई जा सकती है।

राहुल गांधी की मांग का किया जिक्र

कांग्रेस नेताओं ने जातिगत जनगणना को लेकर राहुल गांधी द्वारा लगातार उठाए जा रहे मुद्दे का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार कांग्रेस लंबे समय से देश में जातिगत जनगणना की मांग करती रही है।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया में सुधार की मांग की है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से पहले भी इस संबंध में पत्र भेजे जा चुके हैं।

केंद्र सरकार की नीयत पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

डॉ. अनिल जयहिंद ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार के पास पहले से जातियों की प्रमाणित सूचियां उपलब्ध हैं तो जातिगत जनगणना के दौरान ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है।

कांग्रेस ने दावा किया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सहित विभिन्न सरकारी संस्थानों के पास पिछड़ी जातियों से संबंधित सूचियां मौजूद हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि इन सूचियों को जनगणना प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं किया गया।

कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की।

“आरक्षण और हिस्सेदारी का आधार मजबूत होना जरूरी”

कांग्रेस ने कहा कि जातिगत जनगणना के आंकड़ों का सीधा संबंध सामाजिक न्याय और सरकारी नीतियों से है। पार्टी के अनुसार यदि किसी समुदाय की संख्या सही तरीके से दर्ज नहीं होती है तो उसकी सरकारी योजनाओं, रोजगार, शिक्षा और आरक्षण में हिस्सेदारी का आकलन भी प्रभावित हो सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विशेष रूप से OBC और EBC समुदायों के लिए विश्वसनीय आंकड़े जरूरी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन समुदायों को योजनाओं और आरक्षण का लाभ पर्याप्त रूप से मिल रहा है और कौन से समुदाय अभी भी पीछे हैं।

“मोदी सरकार को सुधार करना ही होगा”

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने की बात कही है, लेकिन मौजूदा प्रारूप में OBC से संबंधित विकल्पों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सभी जातियों की गिनती होनी चाहिए और प्रत्येक जाति को उसकी सही श्रेणी के साथ दर्ज किया जाना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट और प्रमाणित सूची जरूरी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अभी भी सरकार के पास जातिगत जनगणना के प्रारूप में आवश्यक सुधार करने का समय है। पार्टी ने केंद्र से मांग की कि देशव्यापी स्तर पर जनगणना शुरू होने से पहले प्रश्नावली में जरूरी बदलाव किए जाएं।

आंदोलन की चेतावनी

प्रेसवार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप की खामियों को दूर नहीं करती है तो कांग्रेस की अगुवाई में प्रगतिशील विचारधारा वाले दलों और संगठनों के साथ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों की हिस्सेदारी तथा सामाजिक न्याय के मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी।

प्रेसवार्ता में सांसद राकेश राठौर, पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन मनोज यादव, प्रवक्ता डॉ. उमा शंकर पाण्डेय, प्रियंका गुप्ता, रफत फातिमा, सचिन रावत और अलीमुल्ला खान सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।


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