नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास एक पांच मंजिला छात्र PG बिल्डिंग अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। देर शाम तक सामने आई जानकारी के मुताबिक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका बनी हुई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
यह हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। पुलिस के मुताबिक दक्षिण कैंपस थाना क्षेत्र में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास इमारत गिरने की सूचना करीब 1:34 बजे PCR कॉल के जरिए मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, DDMA और CATS एंबुलेंस समेत कई एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया।
‘Hostel Daze’ में रह रहे थे छात्र
बताया जा रहा है कि जिस इमारत के गिरने से यह हादसा हुआ, उसका इस्तेमाल छात्रों के लिए PG यानी पेइंग गेस्ट आवास के रूप में किया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर इस भवन को ‘Hostel Daze’ के नाम से बताया गया है। सत्य निकेतन और उसके आसपास का इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण छात्रों के लिए हॉस्टल और PG का बड़ा केंद्र माना जाता है।
हादसे के वक्त रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र अपने कमरों में मौजूद होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार इमारत में कई कमरे थे और प्रत्येक कमरे में एक से अधिक छात्र रहते थे। इसी वजह से हादसे के तुरंत बाद बड़ी संख्या में लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई।
बेसमेंट में चल रहा था निर्माण और मरम्मत का काम
हादसे की शुरुआती जांच में सबसे बड़ा सवाल बेसमेंट में चल रहे निर्माण या मरम्मत के काम को लेकर उठ रहा है। पुलिस के अनुसार स्थानीय पूछताछ में सामने आया कि करीब 40 से 50 साल पुरानी इस इमारत में बेसमेंट और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं तथा हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बेसमेंट में काम के दौरान पानी भी जमा हो रहा था और इमारत की नींव कमजोर थी। हालांकि, हादसे की अंतिम वजह अभी आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रारंभिक स्तर पर बेसमेंट की खुदाई या निर्माण कार्य से भवन के निचले हिस्से और संरचनात्मक मजबूती पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटीं टीमें
इमारत के अचानक गिरने के बाद पूरा इलाका धूल और मलबे से भर गया। स्थानीय लोग भी तत्काल मौके पर पहुंचे और बचाव टीमों के साथ लोगों को खोजने में मदद करने लगे। कई जगहों पर मलबे को सावधानी से हटाया गया ताकि उसके नीचे दबे लोगों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस के मुताबिक शाम तक नौ लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया, जिनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी थी। बचाए गए लोगों में घायल भी शामिल हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर समय के साथ आंकड़े बदलते रहे हैं; नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना है। भारी मलबे को मशीनों से हटाने के साथ-साथ कई स्थानों पर मैनुअल तरीके से भी तलाशी ली जा रही है, ताकि किसी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
मलबे के अंदर से मदद की आवाजों ने बढ़ाई चिंता
हादसे के बाद कुछ छात्रों के मलबे के अंदर फंसे होने और फोन के जरिए मदद मांगने की खबरों ने परिजनों की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार कुछ फंसे लोगों से संपर्क होने की भी बात सामने आई।
एक कथित वीडियो भी सामने आया जिसमें मलबे के नीचे फंसा एक छात्र मदद की अपील करता दिखाई दिया। ऐसी सूचनाओं के बाद बचाव दल ने तलाशी अभियान और तेज कर दिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौके पर पहुंचीं
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार और प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक जिम्मेदारी तय होने के बाद भवन मालिक या लापरवाही बरतने वाले किसी अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बचाव अभियान की जानकारी ली और सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एक नजदीकी इमारत को एहतियात के तौर पर खाली कराने की जानकारी भी सामने आई है।
भवन मालिक के खिलाफ FIR
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इमारत के मालिक की पहचान किए जाने की जानकारी दी है और उसे तलाशने के लिए टीमें लगाई गई हैं। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार भवन मालिक आनंद बंसल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में निर्माण या मरम्मत कार्य के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और बेसमेंट में चल रहे काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
हादसे ने उठाए पुराने भवनों की सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में हुआ हादसा दिल्ली में छात्र आवासों और पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। साउथ कैंपस के आसपास बड़ी संख्या में निजी PG और हॉस्टल संचालित होते हैं। इन इमारतों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले छात्र रहते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसे वाली इमारत कई दशक पुरानी थी। ऐसे में यह जांच का विषय है कि भवन की संरचनात्मक स्थिति का समय-समय पर निरीक्षण किया गया था या नहीं और उसमें बेसमेंट निर्माण अथवा अन्य बदलाव की अनुमति थी या नहीं।
जांच के बाद सामने आएगी हादसे की असली वजह
फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की है। इसके बाद प्रशासन और जांच एजेंसियां हादसे की तकनीकी जांच करेंगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि इमारत की नींव और संरचना किस स्थिति में थी तथा बेसमेंट में चल रहे काम ने भवन की मजबूती को किस हद तक प्रभावित किया।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाली पुरानी इमारतों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कितनी जरूरी है। सत्य निकेतन जैसे छात्र बहुल इलाकों में किसी भी निर्माण या संरचनात्मक बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।
फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे के नीचे अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच बचाव दल पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की गई है, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए।
यह खबर ही पढ़ें: पासी समाज के नेता बनकर चिराग पासवान आजमाएंगे यूपी के 403 विधानसभा सीटों पर अपनी ताकत













