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लखनऊ, 5 सितंबर 2026। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को लखनऊ में प्रेसवार्ता कर भारतीय जनता पार्टी पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक चंदे, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और दलित-पिछड़े वर्गों के हितों की अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। संजय सिंह ने दावा किया कि गुजरात में पंजीकृत छह ऐसे राजनीतिक दलों को वर्ष 2023-24 के दौरान हजारों करोड़ रुपये का चंदा मिला, जिनकी चुनावी गतिविधियां बेहद सीमित रही हैं।

उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की। इसके अलावा उन्होंने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना, अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्तियों और कथित अनियमितताओं तथा उत्तर प्रदेश की 68,500 शिक्षक भर्ती में OBC आरक्षण से जुड़े मुद्दे को भी उठाया।

छह दलों को हजारों करोड़ के चंदे का दावा

संजय सिंह ने प्रेसवार्ता में कुछ ऐसे राजनीतिक दलों का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने “गुमनाम” और “डमी पार्टियां” बताया। उनके मुताबिक आम जनमत पार्टी, सत्यवादी रक्षक पार्टी, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी, भारतीय नेशनल जनता दल और गरीब कल्याण पार्टी को वर्ष 2023-24 में भारी मात्रा में चंदा मिला।

संजय सिंह ने दावा किया कि इन छह दलों को कुल मिलाकर करीब 5,500 करोड़ रुपये का चंदा मिला। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों ने लोकसभा चुनाव में कुल मिलाकर केवल 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे, ऐसे में इतनी बड़ी राशि मिलने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, प्रेसवार्ता में संजय सिंह ने अलग-अलग दलों के लिए जिन रकम का उल्लेख किया, उनमें कई आंकड़े बताए गए और उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग की। उनके मुताबिक इन राजनीतिक दलों के जरिए कथित तौर पर धन के लेन-देन की जांच होनी चाहिए।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि ये पार्टियां भारतीय जनता पार्टी के लिए “डमी पार्टियों” की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों पर सवाल

आप नेता ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि इतनी बड़ी रकम राजनीतिक दलों को मिली है तो चंदा देने वाले लोगों और संस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं हो रही है और संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच क्यों नहीं की जा रही है।

संजय सिंह ने कहा कि आयकर विभाग, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से भी यह पता लगाने की मांग की कि इन दलों की राजनीतिक गतिविधियां, उम्मीदवारों की संख्या और प्राप्त चंदे के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई देता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023-24 के दौरान इन दलों के पास बड़ी रकम पहुंची, लेकिन इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। संजय सिंह ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को हजारों करोड़ रुपये का चंदा मिला है तो उसके स्रोत और खर्च का ऑडिट तथा जांच होनी चाहिए।

सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर BJP पर हमला

प्रेसवार्ता में संजय सिंह ने सहारनपुर में पुरानी मस्जिद गिराए जाने के मामले को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय भाजपा कथित तौर पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सहारा लेती है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब भी भाजपा को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती हुई दिखाई देती है, तब वह हिंदू-मुस्लिम मुद्दों के जरिए माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करती है। संजय सिंह ने सहारनपुर की घटना को इसी राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए इसे गंभीर मामला बताया।

उन्होंने Places of Worship Act, 1991 का हवाला देते हुए कहा कि 1947 से पहले मौजूद धार्मिक स्थलों की धार्मिक पहचान में बदलाव को लेकर कानून में प्रावधान हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि संबंधित स्थल पुराना धार्मिक स्थल था तो उसे गिराने की कार्रवाई किस आधार पर की गई।

संजय सिंह ने दावा किया कि संबंधित भूमि के आसपास अन्य धार्मिक और सरकारी संरचनाएं भी मौजूद हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव न बढ़ने देने की अपील की।

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी गंभीर आरोप

आप सांसद ने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में हाल की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में दलित समाज से जुड़े लोगों की भागीदारी को कम किया जा रहा है और कुछ ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिनके संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या अन्य संगठनों से रहे हैं।

संजय सिंह ने ट्रस्ट से जुड़े पुराने जमीन विवादों और कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से वह इन मामलों की जांच की मांग करते रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और ट्रस्ट से जुड़े मामलों में जिन लोगों पर सवाल उठे, उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा और किसी भी अनियमितता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।

संजय सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।

68,500 शिक्षक भर्ती में OBC आरक्षण का मुद्दा

प्रेसवार्ता में संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में OBC आरक्षण को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुईं और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को उनका अधिकार नहीं मिला।

उन्होंने दावा किया कि इस मामले में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से भी कार्रवाई और निर्देश दिए गए, लेकिन प्रभावित अभ्यर्थियों की समस्या का समाधान नहीं हुआ।

संजय सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लंबे समय से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए और जिन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

आप नेता ने कहा कि उनकी पार्टी शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा।

9 सितंबर को लखनऊ में AAP की बड़ी बैठक

संजय सिंह ने प्रेसवार्ता में आम आदमी पार्टी की आगामी राजनीतिक गतिविधियों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 9 सितंबर को लखनऊ में AAP उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में प्रदेश के जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी, सह-प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।

पार्टी संगठन को जिलों और विधानसभा स्तर तक मजबूत करने, आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर रणनीति तैयार करने और प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों को विस्तार देने पर भी चर्चा होने की बात कही गई।

2027 से पहले सियासी पारा चढ़ा

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में संजय सिंह की प्रेसवार्ता को आम आदमी पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

उन्होंने एक साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक चंदा, सांप्रदायिक तनाव, राम मंदिर ट्रस्ट और OBC आरक्षण जैसे मुद्दे उठाकर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की।

हालांकि, संजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों में से कई गंभीर राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि या कानूनी निष्कर्ष अलग विषय हैं। ऐसे में इन आरोपों पर भाजपा, चुनाव आयोग और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को सक्रिय करने और सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। 9 सितंबर की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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