up-pacs-employees-salary-sanjay-singh

लखनऊ, 7 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों यानी PACS के कर्मचारियों के कथित लंबित वेतन का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर प्रदेश सरकार पर कर्मचारियों के वेतन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की हजारों पैक्स समितियों में काम करने वाले सचिव, अकाउंटेंट और चौकीदार लंबे समय से नियमित वेतन के इंतजार में हैं।

संजय सिंह के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 7,266 PACS समितियां हैं और इनमें से करीब 5,127 समितियों के कर्मचारियों को पिछले लगभग आठ वर्षों से वेतन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के बकाये का तत्काल भुगतान किया जाए और इस मामले को और लंबा न खींचा जाए। इस दौरान सहकारी समिति कर्मचारी प्रतिनिधि शैलेंद्र तिवारी भी मौजूद रहे। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भी संजय सिंह द्वारा 5,127 समितियों और लंबे समय से वेतन लंबित होने का दावा दर्ज किया गया है।

संजय सिंह ने इसी प्रेस वार्ता में चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर भी सरकार तथा चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी 9 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदर्शन करेगी। पार्टी इस प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े अपने सवालों को उठाएगी।

8 साल से वेतन नहीं मिलने का दावा

संजय सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि PACS यानी प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि ऋण व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके मुताबिक, ऐसी समितियों में काम करने वाले कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही वेतन समस्या पर सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि करीब 5,127 समितियों के सचिव, अकाउंटेंट और चौकीदारों को आठ वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है। संजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2018-19 से ही सरकार को बजट जारी करने के लिए पत्र भेजे जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

इस मुद्दे को लेकर AAP ने कर्मचारियों के आंदोलन के समर्थन की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह इस मामले को सड़क से लेकर संसद तक उठाएगी। मीडिया रिपोर्टों में भी संजय सिंह द्वारा PACS कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने की बात दर्ज की गई है। Visual Live

9 लाख करोड़ के बजट का हवाला देकर सरकार पर निशाना

संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के करीब 9 लाख करोड़ रुपये के बजट का हवाला देते हुए सवाल किया कि यदि कर्मचारियों के बकाये के भुगतान के लिए करीब 313 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है तो सरकार इस समस्या का समाधान क्यों नहीं कर रही है।

AAP नेता का कहना है कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी सहकारी संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन लंबे समय तक अटका रहना गंभीर प्रशासनिक समस्या है।

उन्होंने सरकार से कहा कि कर्मचारियों को उनके बकाये का भुगतान करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए और भुगतान की समयसीमा सार्वजनिक की जाए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹313 करोड़ की आवश्यकता, 5,127 समितियों में वेतन लंबित होने और आठ साल की अवधि से जुड़े आंकड़े संजय सिंह एवं AAP की ओर से किए गए दावे हैं। स्वतंत्र रूप से इन सभी आंकड़ों की पुष्टि के लिए सरकार या सहकारिता विभाग की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

कर्मचारी प्रतिनिधि ने बताए 2,002 कैडर सचिवों के आंकड़े

प्रेस वार्ता में मौजूद सहकारी समिति कर्मचारी प्रतिनिधि शैलेंद्र तिवारी ने भी कर्मचारियों की स्थिति को लेकर अपनी बात रखी। उनके हवाले से बताया गया कि प्रदेश में कुल 2,002 कैडर सचिवों में से 1,223 को नियमित वेतन नहीं मिल रहा है।

कर्मचारी प्रतिनिधि ने यह भी दावा किया कि सहकारिता मंत्री के गृह जनपद में ही करीब 1.80 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है। इसके अलावा कर्मचारियों ने पदोन्नति से जुड़ी समस्या भी उठाई।

उनका कहना है कि कई कैडर सचिव वर्षों की सेवा के बाद भी पदोन्नति के इंतजार में हैं। कर्मचारियों का दावा है कि करीब नौ वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद कैडर सचिवों की ADO पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।

कर्मचारी पक्ष का कहना है कि वेतन भुगतान और पदोन्नति दोनों मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

‘सहकार से समृद्धि’ के नारे पर AAP का सवाल

संजय सिंह ने केंद्र सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की बात की जा रही है, लेकिन दूसरी ओर PACS कर्मचारियों को वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उनका सवाल था कि यदि सहकारी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है तो इन संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

AAP ने सरकार से मांग की कि PACS कर्मचारियों के बकाये की स्थिति का जिला स्तर पर आकलन किया जाए और भुगतान के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए।

80-20 की राजनीति पर भी संजय सिंह का हमला

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस्तेमाल होने वाले 80-20 के राजनीतिक संदर्भ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है, उनके परिवारों की आर्थिक परेशानियों को राजनीतिक नारों से अलग हटकर देखना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के घरों में बच्चों की फीस, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं। AAP नेता ने सरकार से कहा कि कर्मचारियों के भुगतान जैसे मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर प्रशासनिक स्तर पर हल किया जाना चाहिए।

9 अक्टूबर को लखनऊ में AAP का प्रदर्शन

PACS कर्मचारियों के मुद्दे के साथ-साथ आम आदमी पार्टी ने 9 अक्टूबर को लखनऊ में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और SIR को लेकर पार्टी के विरोध के तौर पर प्रस्तावित है।

AAP नेताओं ने इससे पहले भी लखनऊ में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया है। 6 अक्टूबर की रिपोर्टों में भी 9 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग का उल्लेख किया गया था।

भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।

SIR को लेकर AAP के आरोप

संजय सिंह ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

AAP नेता ने चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों और Form 6 से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। हाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चर्चा में रहा है। 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की अंतरिम मांग पर तत्काल आदेश देने से इनकार किया था, लेकिन चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया था। मामले में Form 6 में बदलाव से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।

वहीं, चुनाव आयोग की नागरिक सेवा वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें मतदाता अपना नाम खोजने, Form 6 के जरिए नए मतदाता के रूप में पंजीकरण और अन्य संबंधित सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इससे साफ है कि SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ-साथ प्रक्रिया पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी बहस चल रही है।

‘बैलेट पेपर से चुनाव कराएं’ की मांग

संजय सिंह ने EVM को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि यदि सरकार को चुनावी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है तो बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर विचार किया जाना चाहिए।

उनका तर्क था कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान हो सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को अपनी पार्टी के प्रस्तावित 9 अक्टूबर के प्रदर्शन से भी जोड़ा।

यह मांग फिलहाल AAP का राजनीतिक रुख है। चुनावों में EVM के इस्तेमाल को लेकर निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। इसलिए संजय सिंह के बयान को AAP की राजनीतिक मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी राजनीतिक टकराव

AAP नेता ने अपनी प्रेस वार्ता में ‘वोट चोरी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी राजनीतिक टिप्पणी की और उनके इस्तीफे की मांग की।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों के बीच आयोग की भूमिका और SIR की प्रक्रिया पर अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि विपक्षी दल SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक पक्ष में मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र तथा अपात्र मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।

इसलिए SIR से जुड़े राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक प्रक्रिया के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

मुंद्रा पोर्ट और लखनऊ की बाढ़ का मुद्दा भी उठाया

पत्रकारों के सवालों के जवाब में संजय सिंह ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से जुड़े कथित ड्रग्स बरामदगी के पुराने मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसे मामलों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों होती है।

उन्होंने गुजरात और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जहरीली शराब से हुई मौतों का भी संदर्भ दिया और सरकार से जवाबदेही की मांग की।

इसके साथ ही संजय सिंह ने लखनऊ में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राजधानी के कई इलाकों में बड़ी संख्या में घर जलमग्न हैं और प्रभावित परिवार मुश्किल परिस्थितियों में रह रहे हैं।

AAP नेता ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता राहत कार्य में जुटे हैं और राज्य सरकार को प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करना चाहिए।

PACS कर्मचारियों का मुद्दा अब आंदोलन का रूप ले सकता है

PACS कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा यदि सरकार की ओर से जल्द नहीं सुलझाया गया तो यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक रूप ले सकता है। AAP ने साफ किया है कि वह कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में खड़ी रहेगी।

कर्मचारियों की ओर से मुख्य मांग बकाये वेतन का भुगतान, नियमित वेतन व्यवस्था और पदोन्नति से जुड़े मामलों के समाधान की है। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर यह स्पष्ट होगा कि कितनी समितियों में वास्तव में वेतन लंबित है, कितनी राशि बकाया है और भुगतान के लिए क्या योजना बनाई गई है।

फिलहाल संजय सिंह की प्रेस वार्ता ने PACS कर्मचारियों के कथित आठ साल के बकाये वेतन को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस में ला दिया है। इसके साथ ही 9 अक्टूबर को प्रस्तावित AAP प्रदर्शन के कारण SIR और चुनाव आयोग से जुड़े सवाल भी लखनऊ की राजनीति में चर्चा के केंद्र में रहने वाले हैं।

निष्कर्षतः, एक ही प्रेस वार्ता में AAP ने ग्रामीण सहकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया, EVM-बैलेट पेपर और लखनऊ की बाढ़ जैसे कई मुद्दे उठाए। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उत्तर प्रदेश सरकार PACS कर्मचारियों के वेतन संबंधी दावों पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और 9 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन पर प्रशासन की क्या तैयारी रहती है।

नोट: PACS कर्मचारियों की संख्या, आठ साल के वेतन बकाये, ₹313 करोड़ की आवश्यकता, 1,223 कैडर सचिवों तथा ₹1.80 करोड़ के स्थानीय बकाये से जुड़े आंकड़े संजय सिंह/AAP और कर्मचारी प्रतिनिधि के दावों पर आधारित हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। चुनाव आयोग से संबंधित आरोप भी AAP के राजनीतिक दावे हैं; आयोग की आधिकारिक प्रक्रिया और संबंधित न्यायिक कार्यवाही को अलग संदर्भ में देखना आवश्यक है।

यह खबर भी पढ़ें: 68500 शिक्षक भर्ती: 37वें दिन भी जारी रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन



प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Search

About

नई सोच नई ऊर्जा एक RNI-प्रमाणित (Registered with Registrar of Newspapers for India) और डिजिटल न्यूज़ चैनल है, जो निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रस्तुत करता है।
हम राजनीति, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर विश्वसनीय समाचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं।

हमारी प्राथमिकता है सत्य, पारदर्शिता और जिम्मेदार पत्रकारिता।
ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर ब्रेकिंग न्यूज़ तक, हमारी टीम खबरों की पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करती है।

नई सोच नई ऊर्जा का उद्देश्य है—

  • सटीक और भरोसेमंद समाचार
  • लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती
  • जनआवाज़ को मंच देना
  • डिजिटल माध्यम से त्वरित सूचना

हम मानते हैं कि सही खबर ही समाज को सही दिशा देती है।

Gallery