नई दिल्ली/लखनऊ। देश के बैंकिंग सेक्टर में शुक्रवार को कर्मचारियों और अधिकारियों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। United Forum of Bank Unions (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारी एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। इस आंदोलन के केंद्र में सबसे प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, यानी शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश देने की है। इसके साथ ही Performance Linked Incentive यानी PLI, कर्मचारियों की भर्ती और कई अन्य लंबित मामलों को लेकर भी बैंक यूनियनों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
देशभर में अलग-अलग बैंक शाखाओं और कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और सरकार से लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल छुट्टी बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग सेक्टर में काम करने की परिस्थितियों और कर्मचारियों की समस्याओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे इसमें शामिल हैं।
5-Day Banking बना आंदोलन का मुख्य केंद्र
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग 5-Day Banking है। यूनियनों के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक बैंकिंग और शनिवार-रविवार साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था को लेकर पहले ही समझौते के स्तर पर सहमति बन चुकी है।
बैंक संगठनों का कहना है कि 8 मार्च 2024 को हुए 12वें Bipartite Settlement और 9th Joint Note में इस व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव सामने आया था। प्रस्तावित व्यवस्था में सप्ताह के पांच कार्यदिवस रखने के साथ दैनिक कामकाज के समय में लगभग 40 मिनट की बढ़ोतरी का प्रावधान बताया गया था।
यूनियनों का दावा है कि संबंधित प्रस्ताव सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद अंतिम निर्णय में लगातार देरी हो रही है। यही देरी अब कर्मचारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण बन गई है।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बैंकिंग की दुनिया तेजी से डिजिटल हो चुकी है। आज ग्राहक घर बैठे मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और UPI के माध्यम से कई तरह के लेनदेन कर सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों के लिए भी आधुनिक कार्य-संस्कृति के अनुरूप पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए सिर्फ छुट्टी का सवाल नहीं
बैंक यूनियनों का कहना है कि 5-Day Banking को केवल दो दिन की छुट्टी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक इसका संबंध कर्मचारियों के work-life balance, कार्यक्षमता और मानसिक दबाव से भी है।
बैंक शाखाओं में रोजाना ग्राहकों की भीड़, लेनदेन से जुड़े काम, ऋण संबंधी प्रक्रियाएं, KYC, साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतें और डिजिटल बैंकिंग से संबंधित समस्याओं का दबाव बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि इस बढ़ते कार्यभार के बीच पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होना भी बेहद जरूरी है।
यूनियनों ने बैंकिंग सेक्टर में नई भर्तियों की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त होगी तो मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव कम होगा और ग्राहकों को भी बेहतर सेवा मिल सकेगी।
PLI को लेकर भी विवाद
हड़ताल का दूसरा प्रमुख मुद्दा Performance Linked Incentive यानी PLI है। कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए प्रस्तावित PLI व्यवस्था को लेकर बैंक यूनियनों ने कई सवाल उठाए हैं।
यूनियनों की मांग है कि कर्मचारियों से संबंधित ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव एकतरफा तरीके से लागू करने के बजाय बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच द्विपक्षीय बातचीत के जरिए तय किए जाएं।
हालिया बातचीत के बाद Scale 4 से Scale 8 तक के अधिकारियों से संबंधित 2025-26 की PLI व्यवस्था को फिलहाल abeyance में रखने की जानकारी सामने आई। हालांकि इस मुद्दे पर बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन 5-Day Banking को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं मिलने से UFBU ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया।
सरकार से क्या चाहते हैं बैंक कर्मचारी?
बैंक यूनियनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर केवल चर्चा करने के बजाय अब स्पष्ट निर्णय की दिशा में आगे बढ़े। कर्मचारियों के मुताबिक 5-Day Banking का प्रस्ताव लंबे समय से प्रक्रिया में है और अब इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
यूनियनों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि बातचीत होने के बावजूद उन्हें ऐसी निश्चित तारीख या समयसीमा नहीं मिली है, जिससे यह पता चल सके कि पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था आखिर कब लागू होगी।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर ठोस पहल करती है तो विवाद का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है।
हड़ताल का असर ग्राहकों पर भी
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर बैंक शाखाओं के सामान्य कामकाज पर दिखाई दिया। जिन ग्राहकों को शाखा में जाकर बैंकिंग संबंधी काम कराना था, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
नकद जमा या निकासी, KYC, चेक से जुड़े कार्य, दस्तावेज जमा करने, पासबुक और अन्य शाखा आधारित सेवाओं पर हड़ताल का असर पड़ सकता है।
हालांकि बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं होती, क्योंकि ATM, UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं अलग तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से चलती रहती हैं। फिर भी किसी विशेष बैंक या स्थान पर उपलब्धता तकनीकी और परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है।
आम ग्राहक के सामने भी बड़ा सवाल
5-Day Banking की मांग के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल आम बैंक ग्राहक का है। भारत में बड़ी संख्या में लोग आज भी बैंक शाखाओं पर निर्भर हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, पेंशनर, ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहक और ऐसे लोग जो डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कम करते हैं, उनके लिए शाखा का महत्व अभी भी बना हुआ है।
ऐसे में अगर सप्ताह में पांच दिन ही बैंकिंग होगी तो कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ ग्राहक सेवा को लेकर भी अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
यही वजह है कि 5-Day Banking पर बहस सिर्फ कर्मचारियों और सरकार के बीच का मुद्दा नहीं है। इसमें ग्राहक सुविधा, स्टाफ की उपलब्धता, बैंकिंग की गति और डिजिटल सेवाओं की पहुंच जैसे पहलू भी जुड़े हैं।
क्या पांच दिन की बैंकिंग से बढ़ेगी कार्यक्षमता?
बैंक कर्मचारी संगठनों का मानना है कि आराम और बेहतर work-life balance से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सोमवार से शुक्रवार तक निर्धारित समय में बेहतर तरीके से काम करके बैंकिंग सेवाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है।
दूसरी तरफ यह भी जरूरी होगा कि पांच कार्यदिवसों में पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध रहें और शाखाओं में काम का दबाव इस तरह व्यवस्थित किया जाए कि ग्राहकों को लंबे इंतजार का सामना न करना पड़े।
इसलिए यदि 5-Day Banking व्यवस्था लागू होती है तो उसके साथ स्टाफिंग, ग्राहक सेवा और कामकाज के समय को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाना भी जरूरी होगा।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
11 सितंबर की हड़ताल के बाद भी यदि बैंक यूनियनों और सरकार के बीच समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे बढ़ने की संभावना है। यूनियनों ने आगे के कार्यक्रम को लेकर भी चेतावनी दी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद भी यदि मांगों पर समाधान नहीं होता है तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
इससे साफ है कि बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच आने वाले दिनों में बातचीत बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
अब निगाह सरकार के अगले कदम पर
बैंक कर्मचारियों की मौजूदा हड़ताल ने एक बार फिर 5-Day Banking के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से विचाराधीन हैं और अब उन्हें स्पष्ट निर्णय चाहिए।
वहीं सरकार के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के साथ-साथ करोड़ों बैंक ग्राहकों की सुविधा को भी ध्यान में रखा जाए।
आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि 5-Day Banking को लेकर सरकार कोई ठोस समयसीमा देती है या बैंक यूनियनों का आंदोलन और व्यापक होता है।
फिलहाल बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भारत की बदलती डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के साथ अब पांच दिन के कार्य सप्ताह की शुरुआत होगी, या कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता आगे भी जारी रखना पड़ेगा?
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