लखनऊ: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी CPI(ML) ने उत्तर प्रदेश में वामपंथी नेताओं और किसान आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की निजी जानकारी जुटाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के प्रदेश सचिव सुधाकर यादव ने 24 अगस्त को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नागरिकों के निजता के अधिकार की रक्षा और कथित निगरानी के विरोध में 27 अगस्त को प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
पुलिस और LIU पर निजी जानकारी मांगने का आरोप
CPI(ML) के प्रदेश सचिव सुधाकर यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के माध्यम से वामपंथी और किसान आंदोलनों से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से निजी जानकारी मांगी जा रही है।
पार्टी के मुताबिक, पुलिस थानों से फोन कॉल, WhatsApp संदेशों और कुछ प्रोफार्मा के जरिए लोगों पर यह जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि मांगी जा रही जानकारी में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते का विवरण, परिवार का वंश-वृक्ष, व्यक्तिगत संपर्कों की सूची, चल-अचल संपत्ति, कारोबार, संपत्ति विवाद, आय के स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल गतिविधियों जैसी जानकारियां शामिल हैं।
कई जिलों में प्रक्रिया चलने का दावा
CPI(ML) ने दावा किया है कि इस तरह की कथित डेटा जुटाने की प्रक्रिया प्रदेश के कई जिलों में चल रही है। प्रेस नोट में गोरखपुर, अयोध्या, महाराजगंज, बस्ती, गाजीपुर, पीलीभीत, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, बांदा, मुरादाबाद और मथुरा समेत कई जिलों का उल्लेख किया गया है।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है। हालांकि, ये आरोप CPI(ML) की ओर से लगाए गए हैं और प्रेस नोट में सरकार या पुलिस की ओर से इस पर कोई जवाब शामिल नहीं है।
‘निजता के अधिकार का उल्लंघन’ बताया
सुधाकर यादव ने इस कथित कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के मौलिक अधिकार से जोड़ते हुए इसे अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की प्रोफाइलिंग करना और उनके निजी जीवन में दखल देना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है।
CPI(ML) नेता ने प्रदेश सरकार पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप भी लगाया। प्रेस नोट में उन्होंने कथित ‘पुलिस राज’, फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में मौतों का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों, युवाओं और विभिन्न आंदोलनों से जुड़े लोगों के बीच बढ़ते प्रतिरोध के बीच सरकार कथित निगरानी का सहारा ले रही है।
27 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन
CPI(ML) ने स्पष्ट किया है कि यदि कथित निगरानी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं रोकी गई तो पार्टी व्यापक जन प्रतिरोध शुरू करेगी। इसके तहत 27 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
पार्टी का कहना है कि इस आंदोलन में अन्य विपक्षी और लोकतांत्रिक दलों को भी साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
दस्तावेज में डेटा जुटाने के लिए प्रोफार्मा भी शामिल
प्रेस नोट के साथ लगाए गए दस्तावेजों में एक प्रोफार्मा की तस्वीर भी शामिल है। पेज 3 पर दिखाई दे रहे इस फॉर्म में नाम और पता के साथ आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर, पासपोर्ट नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट का विवरण, वंश वृक्ष, आपराधिक इतिहास, व्यवसाय, संपत्ति संबंधी विवाद, आय का स्रोत और सोशल मीडिया अकाउंट का विवरण जैसी सूचनाओं के लिए कॉलम दिखाई देते हैं।
वहीं, पेज 4 पर संलग्न एक पुलिस पत्र में कुछ व्यक्तियों के संबंध में निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध कराने का उल्लेख है। दस्तावेज पर पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर भी दिखाई देते हैं।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, CPI(ML) का कहना है कि राजनीतिक और किसान आंदोलनों से जुड़े लोगों की इतनी निजी जानकारी जुटाना सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि कथित तौर पर निगरानी और राजनीतिक प्रोफाइलिंग का हिस्सा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर 27 अगस्त को पूरे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन करने जा रही है।
हालांकि, इस प्रेस नोट में लगाए गए आरोप CPI(ML) और उसके प्रदेश सचिव सुधाकर यादव के दावे हैं। इन आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस या संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है। इसलिए पूरे मामले में सरकारी पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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