लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में कार्यरत आउटसोर्स परिचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने एकजुट होकर निगम प्रबंधन के नाम ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट कहा कि वर्षों से नियमित कर्मचारियों के बराबर जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें न तो समान वेतन मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा।आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि वे रोजाना हजारों यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन सुविधाओं और अधिकारों के मामले में उन्हें लगातार उपेक्षित रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि ठेका व्यवस्था के कारण आर्थिक असुरक्षा, अनियमित भुगतान और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
10 सूत्रीय मांगों के साथ प्रबंधन के सामने रखी बात
परिचालकों ने प्रबंधन को दिए ज्ञापन में ठेका प्रथा समाप्त कर नियमित नियुक्ति, समय पर मानदेय भुगतान, ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ लागू करने, ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता, गृह जनपद अथवा नजदीकी डिपो में तैनाती, महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के लिए समान अवसर और ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता जैसी प्रमुख मांगें उठाईं।
कर्मचारियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय भी समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को मान्यता दे चुका है, इसलिए निगम में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए।
नियमितीकरण की उठी मांग
आंदोलन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें आउटसोर्स व्यवस्था में रखा गया है। उनका कहना है कि यदि निगम उनकी सेवाएं नियमित प्रकृति के कार्यों में ले रहा है, तो उन्हें भी नियमित कर्मचारियों जैसी सेवा शर्तें और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
समय पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दाज्ञापन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई बार मानदेय का भुगतान समय पर नहीं होता, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। साथ ही ईपीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई है।चेतावनी भी दीपरिचालकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि फिलहाल उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रबंधन तक पहुंचाई है और अब उन्हें कार्रवाई का इंतजार है।हालांकि, इस पूरे मामले पर खबर लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।













