लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और छात्रों के निष्कासन के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को 48वें दिन भी जारी रहा। लगातार हो रही बारिश के बावजूद छात्र विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर धरने पर डटे रहे। भीगते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि खराब मौसम और प्रशासन की अनदेखी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकती।
आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि पूरी रात बारिश होती रही, जिससे धरने पर बैठे सभी छात्र भीग गए। कई छात्र घंटों तक भीगे कपड़ों में बैठे रहे, जिससे उनकी तबीयत पर भी असर पड़ा। इसके बावजूद किसी ने धरना स्थल छोड़ने का फैसला नहीं किया।
“बारिश से नहीं, प्रशासन की चुप्पी से लड़ाई”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्रों ने कहा कि यह संघर्ष केवल फीस वृद्धि का नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक आवाज को बचाने का है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है और संवाद की बजाय चुप्पी साधे हुए है।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चल रहा है। उनका विश्वास है कि अहिंसक संघर्ष के जरिए ही उनकी मांगों को सुना जाएगा।
कुलपति से भावुक अपील
धरना स्थल से छात्रों ने कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी से अपील करते हुए कहा कि यदि वह उनकी आवाज सुन रहे हैं तो एक बार आंदोलन स्थल पर आकर छात्रों की समस्याएं सुनें।
छात्रों ने कहा कि वे महात्मा गांधी, शहीद चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से प्रेरणा लेते हैं। उनका कहना है कि इतिहास गवाह है कि शांतिपूर्ण आंदोलनों ने बड़े-बड़े सत्ता प्रतिष्ठानों को झुकने पर मजबूर किया है, इसलिए उन्हें भी उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अंततः छात्रों की बात सुनेगा।
आचार्य नरेंद्र देव का भी किया उल्लेख
आंदोलनकारी छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और स्वतंत्रता सेनानी आचार्य नरेंद्र देव का भी जिक्र किया। छात्रों का कहना है कि आचार्य नरेंद्र देव छात्रों के हितों के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन को भी उसी परंपरा का पालन करना चाहिए।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- विश्वविद्यालय में की गई फीस वृद्धि वापस ली जाए।
- आंदोलन में शामिल छात्रों के निष्कासन के आदेश निरस्त किए जाएं।
- छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच तत्काल वार्ता शुरू की जाए।
- छात्रों की शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नई सोच नई ऊर्जा की अपील
यह मामला हजारों छात्रों के भविष्य और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद से जुड़ा है। ऐसे में सभी पक्षों के लिए शांतिपूर्ण बातचीत और लोकतांत्रिक समाधान सबसे बेहतर रास्ता हो सकता है।













