लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, छात्र निष्कासन और अन्य छात्रहितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन छात्र आंदोलन सोमवार को 50वें दिन में प्रवेश कर गया। धरने का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता हर्षित शुक्ला ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आंदोलन को दबाने के लिए अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है।धरनारत छात्रों का कहना है कि वे पिछले 50 दिनों से विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों के अनुसार उन्होंने भीषण गर्मी और अब लगातार हो रही बारिश के बीच भी अपना आंदोलन जारी रखा है। बारिश से बचाव के लिए लगाई गई कैनोपी और प्लास्टिक शीट को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हटाने और फाड़ने का आरोप भी छात्रों ने लगाया है।हर्षित शुक्ला ने आरोप लगाया कि छात्रों द्वारा अपने सामान और धरनास्थल को बारिश से बचाने के लिए लगाई गई कैनोपी को प्रशासन ने कथित रूप से हटवा दिया। वहीं बारिश से बचाव के लिए लगाई गई प्लास्टिक शीट भी फाड़ दी गई, जिसके बाद छात्र खुले आसमान के नीचे धरना देने को मजबूर हैं।छात्र नेता का कहना है कि प्रशासन का उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों का मनोबल तोड़ना है, लेकिन इससे उनका संकल्प कमजोर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन केवल कुछ छात्रों का नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के बच्चों के शिक्षा अधिकार और छात्रहितों की लड़ाई है, जिसे मांगें पूरी होने तक जारी रखा जाएगा।हर्षित शुक्ला ने विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी और कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी से छात्रों के साथ संवाद शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के बजाय प्रशासन को फीस वृद्धि और छात्र निष्कासन जैसे मुद्दों पर सकारात्मक पहल करते हुए वार्ता करनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद से निकल सकता है।छात्रों ने यह भी कहा कि दमनात्मक कार्रवाई से आंदोलन ढंग से संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से छात्रहित में निर्णय लेते हुए फीस वृद्धि और निष्कासन के फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की।हालांकि, इस पूरे मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।मुख्य मांगें:फीस वृद्धि वापस ली जाए।निष्कासित छात्रों की बहाली की जाए।छात्रहितों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन वार्ता करे।आंदोलनरत छात्रों के साथ कथित उत्पीड़न बंद किया जाए।
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