नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। वांगचुक के समर्थन में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की कि अब आंदोलन केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की जाएगी।
अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ सख्ती की गई और अब आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। दीपके ने कहा कि वे स्वयं भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे और 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर की गई, ताकि उनकी जान को किसी प्रकार का खतरा न हो।
अस्पताल ने क्या कहा?
सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन लंबे समय से चल रहे अनशन के कारण वे काफी कमजोर हो चुके हैं और उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा?
वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। अभिजीत दीपके ने स्वयं अनशन शुरू करने का ऐलान किया है और समर्थकों से 20 जुलाई को संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन का दायरा और राजनीतिक बहस दोनों तेज होने की संभावना है।
नोट: अभिजीत दीपके द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग उनका राजनीतिक बयान है। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई स्वास्थ्य कारणों और न्यायालय के निर्देशों के तहत की गई। दोनों पक्षों के दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना शेष है।













