लखनऊ। जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा आयोजित हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सामाजिक सौहार्द, सांप्रदायिक सद्भाव और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में नफरत और विभाजन की राजनीति लोकतंत्र तथा समाज दोनों के लिए नुकसानदेह है और सभी धर्मों के लोगों को मिलकर भाईचारे को मजबूत करना चाहिए।
अपने संबोधन में अरशद मदनी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में मुसलमानों और जमीयत उलेमा-ए-हिंद का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि “ॐ नमः शिवाय” और “अल्लाहु अकबर” दोनों का मूल संदेश ईश्वर को सर्वोच्च मानना है और यही साझा सोच देश को जोड़ने का काम करती है।
रामपुर यूनिवर्सिटी पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान में अनियमितता है तो कानून के तहत जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन ध्वस्तीकरण किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
अरशद मदनी ने आरोप लगाया कि देश में कई मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त करते हुए इसे राजनीतिक विषय बताया।
ज्ञानवापी विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले का अंतिम और स्थायी समाधान सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही निकलना चाहिए, ताकि लंबे समय से चल रहे विवाद का कानूनी रूप से निस्तारण हो सके।
सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना था।













