लखनऊ में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक जिला बदर आरोपी को इंदिरानगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, 22 वर्षीय अनिकेत कौशल उर्फ अमन को छह महीने पहले जिले की सीमा से बाहर रहने का आदेश दिया गया था, लेकिन वह आदेश की खुलेआम अनदेखी करते हुए दोबारा अपने इलाके में रह रहा था।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे मायावती कॉलोनी, तकरोही स्थित पानी की टंकी के पास से गिरफ्तार कर लिया। अब आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत नया मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
छह महीने के लिए किया गया था जिला बदर
पुलिस के अनुसार, आरोपी अनिकेत कौशल उर्फ अमन लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया गया था। इसी आधार पर 19 जून 2026 को संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) के आदेश पर उसे छह महीने के लिए लखनऊ जिले की सीमा से निष्कासित (जिला बदर) किया गया था।
लेकिन आदेश के बावजूद आरोपी वापस इंदिरानगर में रहने लगा। जैसे ही इसकी सूचना पुलिस को मिली, टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के लिए क्यों था यह आरोपी चुनौती?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मारपीट, बलवा, धमकी और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। आरोपी के खिलाफ इंदिरानगर, इटौंजा और गाजीपुर थानों में भी केस दर्ज हैं।
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड
- वर्ष 2023 में मारपीट, बलवा और धमकी का मुकदमा।
- वर्ष 2025 में इटौंजा थाने में गंभीर धाराओं में केस।
- इंदिरानगर थाने में कई आपराधिक मुकदमे।
- गाजीपुर थाने में भी गंभीर धाराओं और सीएलए एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज।
इलाके में मचा हड़कंप
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इंदिरानगर और तकरोही क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों को साफ संदेश गया है कि जिला बदर का आदेश तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस का सख्त संदेश
इंदिरानगर पुलिस ने साफ किया है कि जिला बदर के आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
क्या होता है जिला बदर?
जिला बदर एक कानूनी कार्रवाई है, जिसके तहत ऐसे व्यक्ति को, जिसकी गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा मानी जाती हैं, एक निश्चित अवधि तक जिले की सीमा से बाहर रहने का आदेश दिया जाता है। आदेश का उल्लंघन करने पर अलग से मुकदमा दर्ज किया जाता है।













