लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी, छात्रों के निष्कासन और अन्य मांगों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन छात्र आंदोलन सोमवार को 49वें दिन भी जारी रहा। लगातार हो रही बारिश के बावजूद आंदोलनकारी छात्र विश्वविद्यालय के गेट पर डटे रहे। इस बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि बारिश से बचाव के लिए लगाई गई कैनोपी (टेंट) को हटाने का दबाव बनाया गया और उसे फाड़े जाने की भी कोशिश की गई।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि रविवार को तेज बारिश में घंटों भीगने के कारण कई छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद छात्रों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर एक छोटी कैनोपी लगाई, ताकि बारिश से खुद और आंदोलन स्थल पर रखे सामान की सुरक्षा की जा सके। लेकिन सोमवार सुबह विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे हटाने का निर्देश दिया, जिससे मौके पर पुलिस, सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
छात्र नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि बारिश और खराब मौसम के कारण छात्र आंदोलन समाप्त कर दें। उनका कहना है कि यह केवल एक टेंट नहीं था, बल्कि खराब मौसम से बचने का एक साधन था। इसके बावजूद प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज करते हुए उसे हटाने का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी से अपील करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया जा रहा है, तो कम से कम उनकी परेशानियां बढ़ाने का प्रयास न किया जाए। छात्रों का कहना है कि पिछले 49 दिनों से वे भीषण गर्मी, धूप और अब बारिश के बीच लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
छात्रों ने कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी से भी मांग की कि फीस वृद्धि, निष्कासित छात्रों की बहाली और अन्य लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि आंदोलन को दबाव या कठिन परिस्थितियों के जरिए खत्म नहीं कराया जा सकता।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कहा कि चाहे बारिश हो या अन्य कठिन परिस्थितियां, जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- फीस बढ़ोतरी वापस लेने की मांग
- निष्कासित छात्रों की बहाली
- छात्र हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान
- आंदोलनरत छात्रों के साथ मानवीय व्यवहार













