लखनऊ। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग को “अमानवीय” बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के साथ अत्याचार और अन्याय को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने छात्र आंदोलन, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, विद्यार्थियों की आत्महत्या, सरकार की जवाबदेही और गौरक्षा सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके आंदोलन को किसी राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

“हम पक्ष-विपक्ष नहीं जानते, हम किसी पार्टी के गुरु नहीं”

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने कार्यक्रमों में विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक रूप से पक्ष और विपक्ष का भेद नहीं करते। उनके अनुसार, “हम हिंदुओं के गुरु हैं, किसी पार्टी के गुरु नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों में हिंदू हैं और अगर कोई व्यक्ति उनके पास धार्मिक या गौरक्षा के मुद्दे को लेकर आता है तो केवल उसकी राजनीतिक पहचान के आधार पर उसे रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने भाजपा नेताओं को भी गौरक्षा के मुद्दे पर आगे आने का आह्वान किया। शंकराचार्य ने सवाल किया कि अगर किसी दूसरी पार्टी से जुड़ा व्यक्ति गौमाता की रक्षा की बात करता है तो उसे केवल राजनीतिक चश्मे से क्यों देखा जाए?

जंतर-मंतर की कार्रवाई पर जताई नाराजगी

शंकराचार्य ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ जो दृश्य सामने आए, वे परेशान करने वाले हैं।

उन्होंने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और अपने भविष्य को लेकर जवाबदेही चाहते हैं। उनका सवाल है कि जब परीक्षा में गड़बड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पेपर लीक होता है तो क्या उसका कोई जिम्मेदार नहीं है? अगर कोई जिम्मेदार है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषी व्यक्ति को दंड मिलना चाहिए।

छात्र आत्महत्या के मामलों पर भी उठाया सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के तनाव और आत्महत्या के मामलों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी समस्याओं को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि छात्र लगातार परीक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मांग जवाबदेही तय करने की है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।

सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल

शंकराचार्य ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती और उनका रवैया देखकर ऐसा महसूस हुआ जैसे देश के विद्यार्थी ही निशाने पर हों।

उन्होंने इसे “कंपा देने वाला दृश्य” बताते हुए पूछा कि क्या अपने ही देश के विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित है?

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े ये दावे शंकराचार्य के बयान पर आधारित हैं और इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

समर्थकों को परेशान करने का लगाया आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने गौरक्षा अभियान से जुड़े लोगों को कथित रूप से परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन से जुड़े कुछ लोगों को घरों पर ही रोक दिया गया, जबकि कुछ लोगों को नोटिस भेजे गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे कुछ समर्थकों को होटल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कुछ समर्थकों को बुलडोजर कार्रवाई की कथित चेतावनी मिलने और बिजली सहित अन्य प्रशासनिक मामलों के जरिए दबाव बनाए जाने की बात भी कही।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

गौरक्षा को लेकर सरकार से सवाल

शंकराचार्य ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि उनका अभियान किसी राजनीतिक दल के खिलाफ या समर्थन में नहीं, बल्कि गौमाता की रक्षा के लिए है।

उन्होंने सवाल किया कि कौन-सा राजनीतिक दल गौरक्षा को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में लेकर चल रहा है? उन्होंने कहा कि यदि भाजपा से जुड़े लोग भी गौरक्षा के लिए उनके कार्यक्रम में आते हैं तो उनका स्वागत है और यदि किसी विपक्षी दल से जुड़ा हिंदू गौरक्षा के लिए आता है तो उसे भी रोका नहीं जा सकता।

उन्होंने अपने अभियान को किसी विशेष राजनीतिक पार्टी से जोड़ने के प्रयासों को गलत बताया।

अब डिजिटल माध्यम से होगा गौरक्षा कार्यक्रम

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि लखनऊ में प्रस्तावित गौरक्षा कार्यक्रम को अनुमति से जुड़ी परिस्थितियों के कारण प्रत्यक्ष आयोजन के बजाय डिजिटल माध्यम से आयोजित करने का फैसला लिया गया है।

उन्होंने कहा कि वे लखनऊ में ही रहकर डिजिटल माध्यम से लोगों को संबोधित करेंगे। इस दौरान गौरक्षा आंदोलन की आगे की रणनीति, आगामी कार्यक्रम और अभियान को देशभर में आगे बढ़ाने की योजना पर जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने प्रदेश और देश के लोगों से डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ने की अपील भी की।

छात्र आंदोलन और गौरक्षा पर केंद्रित रही प्रेस कॉन्फ्रेंस

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की लखनऊ प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों—छात्रों की समस्याओं और गौरक्षा—पर केंद्रित रही। उन्होंने जंतर-मंतर की कार्रवाई पर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की, वहीं स्पष्ट किया कि उनके गौरक्षा अभियान को किसी एक राजनीतिक दल से जोड़ना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर गड़बड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

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