लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों का धरना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि वे पिछले 51 दिनों से अपनी समस्याओं और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया है। इसी बीच लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष अल्पना बाजपेयी ने धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अल्पना बाजपेयी ने आंदोलनरत छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं को सुनना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कुछ छात्रों के खिलाफ निष्कासन जैसी कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए इसे चिंताजनक बताया।
“पहले छात्रों से बात करने आते थे कुलपति”
अल्पना बाजपेयी ने अपने छात्र राजनीति के दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन होने पर प्रशासनिक अधिकारी छात्रों से सीधे संवाद करते थे।
उनके मुताबिक, यदि छात्र किसी समस्या को लेकर धरने पर बैठते थे तो कुलपति, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और छात्रसंघ के पदाधिकारी बातचीत के माध्यम से विवाद को समाप्त करने की कोशिश करते थे।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो गई है कि छात्रों को लंबे समय तक धरने पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने कुलपति से अपील की कि वे स्वयं आंदोलनरत छात्रों के बीच जाएं, उनकी समस्याएं सुनें और समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा बताएं।
फीस और सुविधाओं को लेकर भी उठाए सवाल
पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष ने विश्वविद्यालय में छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं के लिए फीस देते हैं तो उन्हें उसके अनुरूप सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में शौचालयों की स्थिति, पार्किंग व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र यदि इन विषयों पर सवाल उठाते हैं तो उनकी बात सुनना जरूरी है।
अल्पना बाजपेयी ने कहा कि विद्यार्थियों को लैपटॉप या स्कूटी जैसी योजनाओं का लाभ देने के साथ-साथ उनकी शिक्षा की लागत और विश्वविद्यालय की मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
छात्र आंदोलन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
बाजपेयी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय छात्रों के लिए है और इसलिए प्रशासन तथा विद्यार्थियों के बीच संवाद की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना महत्वपूर्ण है।
जंतर-मंतर के छात्र प्रदर्शन का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान अल्पना बाजपेयी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं से जुड़े प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं की समस्याओं को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों की पेंशन, प्रतियोगी परीक्षाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।
“छात्रों की बात सुनें और अधिकार वापस दें”
अल्पना बाजपेयी ने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति से आंदोलनरत विद्यार्थियों के साथ बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी मांग को तुरंत पूरा करना संभव नहीं है तो प्रशासन छात्रों को स्पष्ट रूप से बताए कि उस पर कब और किस तरह कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने मांग की कि जिन छात्रों के खिलाफ निष्कासन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, उनके मामलों पर विश्वविद्यालय प्रशासन पुनर्विचार करे।
फिलहाल आंदोलनरत छात्र अपनी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत से लंबे समय से जारी गतिरोध का कोई समाधान निकलता है या नहीं।
नोट: इस खबर में अल्पना बाजपेयी और आंदोलनरत पक्ष की ओर से लगाए गए आरोप एवं दावे उनके बयानों पर आधारित हैं। संबंधित आरोपों पर लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।













