लखनऊ, 22 जुलाई। लखनऊ विश्वविद्यालय में चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार को रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे का समर्थन मिला। उन्होंने धरनास्थल पर पहुंचकर चरखा चलाया और गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
संदीप पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार को छात्रों की जायज़ मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि छात्रों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय का इतिहास लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है। ऐसे में छात्रों की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और समाजसेवियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान की गरिमा को बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
धरनास्थल पर मौजूद छात्र नेताओं ने भी अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान छात्र विभिन्न तख्तियां और बैनर लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराते रहे।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्याओं पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। आंदोलन के दौरान परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई।













